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झारखंड हाई कोर्ट ने सावन में वैद्यनाथ मंदिर खोलने के बारे में झारखंड सरकार से किया जवाब तलब

झारखंड उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को श्रावण मास में देवघर में भगवान वैद्यनाथ धाम एवं वासुकीनाथ के मंदिर को भक्तों के दर्शनार्थ खोले जाने के संबन्ध में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से इस बारे में उसका मत बताने को कहा. इस कारण धार्मिक यात्रा के महत्व को देखते हुए मंदिर को खोला जाना चाहिए. याचिका में कहा गया है कांवर यात्रा पर आज तक कभी रोक नहीं लगी है.

झारखंड हाई कोर्ट ने सावन में वैद्यनाथ मंदिर खोलने के बारे में झारखंड सरकार से किया जवाब तलब
झारखंड हाई कोर्ट (Photo Credits : File Photo)

रांची, 27 जून: झारखंड उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को श्रावण मास में देवघर में भगवान वैद्यनाथ धाम एवं वासुकीनाथ के मंदिर को भक्तों के दर्शनार्थ खोले जाने के संबन्ध में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से इस बारे में उसका मत बताने को कहा. बीजेपी सांसद निशिकांत दूबे की जनहित याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश डॉ रवि रंजन और सुजीत नारायण प्रसाद की पीठ ने सरकार को यह बताने को कहा है कि वर्तमान स्थिति में कांवर यात्रा शुरू की जा

सकती है या नहीं. साथ ही उससे यह भी जानना चाहा कि आम लोगों के लिए बाबाधाम और वासुकीनाथ मंदिर को खोलने की कोई योजना तैयार की गयी है या नहीं? पीठ ने इस मामले में बिहार सरकार को भी प्रतिवादी बनाते हुए उसे भी इस मामले में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया. कांवर यात्रा बिहार के सुल्तानगंज से शुरु होती है अतः बिहार सरकार का पक्ष जानने के लिए न्यायालय ने उसे भी प्रतिवादी बनाया है.

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पीठ ने देवघर के उपायुक्त और पंडा धर्मरक्षिणी सभा को भी नोटिस जारी करते हुए उनसे अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया. इन सभी को 30 जून तक शपथपत्र के माध्यम से जवाब दाखिल करने का निर्देश न्यायालय ने दिया. गोड्डा से बीजेपी सांसद निशिकांत दूबे ने जनहित याचिका दायर कर श्रावण में देवघर के वैद्यनाथ धाम और वासुकीनाथ मंदिर खोलने का आग्रह किया है.

याचिका में कहा गया है कि वैद्यनाथ धाम और वासुकीनाथ मंदिर हिन्दुओं का बड़ा तीर्थ स्थल है. यहां पूरे देश से लाखों लोग प्रति वर्ष श्रावण में कांवर लेकर जल चढ़ाने आते हैं. मंदिर में नियमित पूजा भी होती है.

इस कारण धार्मिक यात्रा के महत्व को देखते हुए मंदिर को खोला जाना चाहिए. याचिका में कहा गया है कांवर यात्रा पर आज तक कभी रोक नहीं लगी है. प्राकृतिक आपदा और 19 वीं सदी में प्लेग और कालरा जैसी महामारी में भी मंदिर में पूजा होती थी और कांवर यात्रा जारी थी. मामले में अगली सुनवाई तीस जून को होगी.

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(The above story first appeared on LatestLY on Jun 27, 2020 01:16 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).