देश की खबरें | उच्च न्यायालय ने अपमानजनक पोस्ट पर रोक के लिए मोइत्रा की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने टीएमसी नेता महुआ मोइत्रा की भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और वकील जय अनंत देहाद्रई को उनके खिलाफ कोई भी कथित फर्जी और अपमानजनक सामग्री पोस्ट करने से रोकने संबंधी अंतरिम अर्जी पर बुधवार को आदेश सुरक्षित रख लिया।
नयी दिल्ली, 20 दिसंबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने टीएमसी नेता महुआ मोइत्रा की भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और वकील जय अनंत देहाद्रई को उनके खिलाफ कोई भी कथित फर्जी और अपमानजनक सामग्री पोस्ट करने से रोकने संबंधी अंतरिम अर्जी पर बुधवार को आदेश सुरक्षित रख लिया।
मोइत्रा को हाल में लोकसभा से निष्कासित कर दिया गया था। वह लोकसभा में पश्चिम बंगाल की कृष्णानगर सीट का प्रतिनिधित्व करती थीं। उच्च न्यायालय ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेता मोइत्रा, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद दुबे और देहाद्रई के वकील को सुनने के बाद अंतरिम अर्जी पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।
अदालत ने प्रतिवादियों के वकील से जानना चाहा कि क्या मोइत्रा और कारोबारी दर्शन हीरानंदानी के बीच कोई लेन-देन हुआ था।
मोइत्रा ने अक्टूबर में दायर अपनी याचिका में दुबे, देहाद्रई, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’, सर्च इंजन गूगल, यूट्यूब और 15 मीडिया संस्थानों के खिलाफ स्थायी निषेधाज्ञा की मांग की थी और अनुरोध किया था कि उनके खिलाफ अपमानजनक, प्रथम दृष्टया झूठे और दुर्भावनापूर्ण बयान प्रकाशित करने, प्रसारित करने पर रोक लगाई जाए। उन्होंने हर्जाना भी मांगा है।
बाद में मोइत्रा ने पक्षकारों की सूची से सभी मीडिया घरानों और सोशल मीडिया मध्यस्थों को हटा दिया और कहा कि उनका मामला केवल दुबे और देहाद्रई के खिलाफ है।
दलीलों के दौरान, देहाद्रई की ओर से पेश वरिष्ठ वकील संजय घोष और दुबे का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील अभिमन्यु भंडारी ने दावा किया कि मोइत्रा को अपने व्यावसायिक हितों के पक्ष में सवाल पूछने के लिए हीरानंदानी से बदले में उपहार और अन्य लाभ मिले।
उन्होंने लोकसभा आचार समिति की रिपोर्ट का भी हवाला दिया और कहा कि समिति ने भी उनके और हीरानंदानी के बीच साठगांठ पाई, जिसके परिणामस्वरूप अंततः मोइत्रा को निष्कासित कर दिया गया।
अदालत ने वकील से समिति की रिपोर्ट के प्रासंगिक उद्धरण को रिकॉर्ड पर रखने को कहा।
मोइत्रा के वकील ने दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि उन्हें हीरानंदानी से उपहार मिले थे क्योंकि वे दोस्त थे, न कि संसद में सवाल पूछने के लिए। वकील ने दावा किया कि देहाद्रई और दुबे अभी भी मोइत्रा के खिलाफ मानहानिकारक बयान दे रहे हैं और अदालत से उन्हें ऐसा करने से रोकने का आग्रह किया।
दुबे ने मोइत्रा पर संसद में सवाल पूछने के लिए हीरानंदानी समूह के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) दर्शन हीरानंदानी से रिश्वत लेने का आरोप लगाया था और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से उनके खिलाफ आरोपों की छानबीन के लिए एक जांच समिति गठित करने का आग्रह किया था।
वकील देहाद्रई से मिले एक पत्र का हवाला देते हुए दुबे ने कहा था कि वकील ने कारोबारी द्वारा कथित तौर पर टीएमसी नेता को रिश्वत दिए जाने के ‘‘अकाट्य’’ सबूत साझा किए हैं।
लोकसभा अध्यक्ष को लिखे अपने पत्र में दुबे ने दावा किया कि हाल तक लोकसभा में मोइत्रा द्वारा पूछे गए 61 प्रश्नों में से 50 अडाणी समूह पर केंद्रित थे, जिस व्यापारिक समूह पर टीएमसी सांसद अक्सर कदाचार का आरोप लगाती रही हैं।
इन आरोपों के आधार पर लोकसभा आचार समिति ने मोइत्रा को निचले सदन से निष्कासित करने का सुझाव दिया था जिसके बाद उन्हें 8 दिसंबर को निष्कासित कर दिया गया।
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(The above story first appeared on LatestLY on Dec 20, 2023 06:54 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

