नयी दिल्ली, 26 सितंबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को एक हाथी के स्वामित्व का दावा करने वाले व्यक्ति की खिंचाई करते हुए कहा कि वह सिर्फ जानवर पर क्रूरता करना चाहता है और व्यावसायिक उद्देश्य के लिए उसका शोषण करना चाहता है।
न्यायमूर्ति मनमोहन और न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा की पीठ ने कहा, "आप उन अधिकारियों के खिलाफ अवमानना याचिका दायर कर रहे हैं, जो हाथी की देखभाल कर रहे हैं। हमें मोहरे के रूप में इस्तेमाल करना बंद करें। यह सब अदालत पर एक मजाक है। आप सिर्फ जानवर पर क्रूरता करना चाहते हैं। आप वाणिज्यिक उद्देश्यों के लिए जानवर का शोषण करना चाहते हैं।"
यूसुफ अली ने न्यायिक आदेशों का कथित उल्लंघन कर हाथी को अपने कब्जे में लेने की कोशिश करने के लिए आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार के कुछ अधिकारियों के खिलाफ अवमानना कार्रवाई का अनुरोध किया था।
अदालत ने कहा कि व्यक्ति को खुश होना चाहिए कि पिछले चार साल से जानवर की इतनी अच्छी तरह से देखभाल की जा रही है।
उसने कहा, "आपके अंदर जानवरों के लिए दिल होना चाहिए। आप केवल इसलिए परेशान हैं, क्योंकि आप उसे व्यावसायिक हित और लाभ के लिए चाहते हैं। आप अदालती प्रक्रिया का फायदा उठाने के लिए नहीं बने हैं। उस व्यक्ति को लगता है कि वह अदालत का शोषण कर सकता है? ये उचित नहीं है, आप अदालत का इस्तेमाल कर रहे हैं।"
अदालत ने कहा, "एक हाथी कितना खाता है, क्या आप जानते हैं। आप खुद कह रहे हैं कि याचिकाकर्ता एक गरीब आदमी है, वह जानवर की देखभाल कैसे करेगा? आप इस याचिका में स्वामित्व का फैसला नहीं करवा सकते।"
याचिकाकर्ता अली के मुताबिक, उच्च न्यायालय ने पांच अप्रैल 2019 और 14 मई 2019 के अंतरिम आदेशों द्वारा सरकार को निर्देश दिया था कि वह उसके स्वामित्व वाले किसी भी हाथी को अपने कब्जे में न ले।
हालांकि, छह जुलाई 2019 को वन्यजीव और वन विभाग के अधिकारियों ने अदालत के आदेशों का उल्लंघन करते हुए हथिनी लक्ष्मी को बलपूर्वक ले जाने की कोशिश की थी।
उस व्यक्ति ने एकल न्यायाधीश के उस फैसले को भी चुनौती दी है, जिसमें उसने सरकार के 19 फरवरी 2019 के अपने अधिकारियों को उसके हाथियों को कब्जे में लेने के निर्देश के खिलाफ उसकी याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया था।
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