देश की खबरें | उच्च न्यायालय ने धन शोधन मामले के आरोपी को जमानत दी, कहा-महज अनुमानों पर आगे नहीं बढ़ सकते
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने कथित हवाला कारोबारी नरेश जैन से जुड़े धन शोधन के एक मामले में इंदौर के रियल इस्टेट उद्यमी विजय अग्रवाल को सोमवार को जमानत दे दी।
नयी दिल्ली, 29 मई दिल्ली उच्च न्यायालय ने कथित हवाला कारोबारी नरेश जैन से जुड़े धन शोधन के एक मामले में इंदौर के रियल इस्टेट उद्यमी विजय अग्रवाल को सोमवार को जमानत दे दी।
अदालत ने कहा कि जब किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता की बात आती है, तो वह महज अनुमानों और अवधारणाओं के आधार पर आगे नहीं बढ़ सकती है।
न्यायमूर्ति दिनेश कुमार शर्मा ने कहा कि इस स्तर पर धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत जमानत देने पर कोई ‘पूर्ण रोक’ नहीं है और न ही ‘अपराध साबित करने के लिए जांच के सकारात्मक नतीजे पेश करने’ की आवश्यकता है।
न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा कि प्राप्त धन और अनुसूचित अपराध से संबंधित आपराधिक गतिविधियों के बीच कोई ठोस कड़ी होनी चाहिए, जिसके लिए अभियुक्त को जिम्मेदार ठहराया जा सकता हो।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का आरोप है कि नरेश जैन ने अपने भाई बिमल जैन और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेजों के जरिये विदेशी मुद्रा के अवैध लेन-देन में लिप्त होकर सरकारी खजाने और बैंकों को नुकसान पहुंचाने की आपराधिक साजिश रची।
जांच एजेंसी ने अदालत से कहा कि साजिश के तहत विजय अग्रवाल ने एक कंपनी के शेयर वास्तविक मूल्यांकन से कम कीमतों में खरीदे और सह-आरोपियों की शेल कंपनियों से कर्ज भी लिया।
शेल कंपनी ऐसी कंपनी को कहते हैं, जिसका अस्तित्व सिर्फ कागजों तक सीमित होता है। ईडी ने अग्रवाल को इस मामले में मार्च 2022 में गिरफ्तार किया था।
उच्च न्यायालय ने अग्रवाल के इस दावे का संज्ञान लिया कि वह इस बात से अनजान थे कि वह काली कमाई का लेन-देन कर रहे हैं। अदालत ने कहा कि अग्रवाल के इस दावे को यांत्रिक रूप से खारिज नहीं किया जा सकता और उन्हें 25 लाख रुपये के मुचलके पर सशर्त जमानत दे दी।
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