देश की खबरें | उच्च न्यायालय ने वकीलों के लिए बीमा योजनाओं के प्रीमियम में अत्यधिक वृद्धि पर चिंता जताई

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने सरकारी कंपनियों द्वारा वकीलों के लिए बीमा योजनाओं के प्रीमियम में अत्यधिक बढ़ोतरी पर चिंता प्रकट की और कहा कि इससे मुख्यमंत्री अधिवक्ता कल्याण योजना के उद्देश्य को झटका लगेगा।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 29 अगस्त दिल्ली उच्च न्यायालय ने सरकारी कंपनियों द्वारा वकीलों के लिए बीमा योजनाओं के प्रीमियम में अत्यधिक बढ़ोतरी पर चिंता प्रकट की और कहा कि इससे मुख्यमंत्री अधिवक्ता कल्याण योजना के उद्देश्य को झटका लगेगा।

अदालत ने दिल्ली सरकार द्वारा दाखिल स्थिति रिपोर्ट पर गौर किया जिसमें कहा गया है कि योजना की शुरुआत के बाद बीमा कंपनियों ने प्रीमियम की राशि में बढ़ोतरी कर दी और पिछले साल नवंबर तथा दिसंबर में पूर्व के अपने बयान से पीछे हट गईं।

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अदालत ने शुक्रवार को जारी आदेश में उल्लेख किया कि बीमा कंपनियों ने समूह बीमा और मेडिक्लेम योजनाओं, दोनों के लिए प्रीमियम में ढाई गुना बढ़ोतरी कर दी है।

न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने कहा, ‘‘इस अदालत की राय है कि आठ महीने में ही प्रीमियम में अचानक इतनी वृद्धि बहुत ज्यादा है। इस दर पर तो मुख्यमंत्री अधिवक्ता कल्याण योजना का कोई महत्व ही नहीं रह जाएगा।’’

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अदालत बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीडी) की एक याचिका समेत कुछ अन्य याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। याचिका में वकीलों के लिए ‘मेडिक्लेम’ और ‘टर्म इंश्योरेंस’ के संबंध में रियायत का अनुरोध किया गया।

न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी (एनआईएसी) ने नवंबर और दिसंबर 2019 में प्रति पॉलिसी 8,500 रुपये के हिसाब से ‘ग्रुप मेडिक्लेम’ बीमा देने का जिक्र किया था। इसमें संशोधिन कर प्रति पॉलिसी प्रीमियम राशि 22,945.1 रुपये कर दी गयी ।

इसी तरह भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ने 60 साल की आयु तक के वकीलों के लिए 2478 रुपये प्रीमियम पर समूह (टर्म) जीवन बीमा मुहैया कराने का उल्लेख किया लेकिन अब औसत प्रीमियम राशि 7,091.7 रुपये कर दी गई है।

प्रीमियम राशि में ढाई गुना की वृद्धि के तथ्यों पर विचार करते हुए अदालत ने निर्देश दिया कि एलआईसी के एक वरिष्ठ अधिकारी के साथ बैठक की जाएगी जो निर्णय लेने में सक्षम हो। यह बैठक चार सितंबर को होगी। इस बैठक में दिल्ली सरकार द्वारा गठित तकनीकी आकलन समिति के सदस्य भी होंगे।

न्यायमूर्ति ने कहा कि एलआईसी को समाधान निकालने का प्रयास करना चाहिए ।

अदालत ने एनआईएसी के अध्यक्ष को भी एक वरिष्ठ अधिकारी नियुक्त करने को कहा जो प्रीमियम भुगतान के संबंध में समाधान पर पहुंचने में मदद करेंगे।

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