नयी दिल्ली, एक जून दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इंकार कर दिया, जिसमें केंद्र को यह निर्देश देने की मांग की गई थी कि कोविड-19 महामारी के दौरान वह महिलाओं को किसी भी तरह की हिंसा और भेदभाव से बचाने के लिए पूरे देश की खातिर दिशानिर्देश तैयार करे। अदालत ने कहा कि ‘‘खबरों में आने के लिए’’ यह याचिका दायर की गई है।
न्यायमूर्ति राजीव सहाय एंडलॉ और न्यायमूर्ति आशा मेनन की पीठ ने याचिका दायर करने वाले वकीलों को चेताया कि ‘‘भविष्य में जनहित याचिका के माध्यम का दुरूपयोग नहीं करें।’’ अदालत ने कहा कि इस बार वह उन्हें बिना जुर्माना भरे याचिका वापस लेने की अनुमति दे रही है।
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उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि ‘‘याचिकाकर्ता यह जवाब नहीं दे पा रहे हैं कि कैसे और किस कानून के तहत यह अदालत ‘संपूर्ण भारत के लिए व्यापक दिशानिर्देश’ जारी करने के लिए कहे और दूसरे राज्यों पर यह कैसे लागू होगा, जिनके अपने उच्च न्यायालय हैं।’’
आदेश में अदालत ने कहा, ‘‘वे यह भी नहीं बता पा रहे हैं कि यह विषय जिसमें दिशानिर्देश देने की बात है, यह केंद्र सरकार या राज्यों की विधायी सूची में आती है।’’
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पीठ का मूड भांपते हुए याचिकाकर्ताओं ने याचिका वापस ले ली।
पीठ ने कहा, ‘‘याचिका वापस लिया गया मानकर खारिज की जाती है।’’ इसने याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिए कि भविष्य में सावधानी बरतें और कानून का अध्ययन किए बगैर जनहित याचिकाएं दायर नहीं करें।
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