देश की खबरें | उच्च न्यायालय ने सेना के अधिकारी की नौकरी को चुनौती देने वाली याचिका जुर्माने के साथ खारिज की

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नयी दिल्ली, 28 फरवरी दिल्ली उच्च न्यायालय ने सेना में नियुक्ति के समय गलत सूचना देने के आधार पर एक कर्मचारी की नौकरी खत्म करने के आग्रह संबंधी एक जनहित याचिका सोमवार को 25000 रूपये जुर्माना लगाते हुए खारिज कर दी।

मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा की पीठ ने कहा कि यह बिल्कुल ही जनहित याचिका नहीं, बल्कि ब्लैकमेल करने का वाद है।

अदालत ने कई आधार पर यह याचिका खारिज कर दी जिनमें एक यह था कि याचिकाकर्ता ने उस व्यक्ति को पक्षकार नहीं बनाया जिसकी नौकरी उसने खत्म करने का आग्रह किया था, दूसरा याचिका दायर करने में उसने देरी कर दी।

याचिकाकर्ता के वकील ने आरोप लगाया कि जिस संबंधित व्यक्ति को 2015 में जूनियर कमीशंड अधिकारी नियुक्त किया गया था, उसके द्वारा प्रदान किया गया ब्योरा गलत था, इसलिए उसकी नौकरी खत्म कर दी जाए।

पीठ ने कहा, ‘‘ जनहित याचिका तो दूर, हमें इस याचिका पर गौर करने का कोई कारण नजर नहीं आता। ’’

न्यायालय ने कहा कि यह तथाकथित जनहित याचिका विशुद्धत: सेवाविषय है क्योंकि सेवाएं खारिज करने की मांग की गयी है और यह कानून में मान्य नहीं है।

पीठ ने कहा, ‘‘ बताये गय कारणों एवं न्यायिक उद्घोषणाओं के संचयी प्रभाव के तौर पर याचिका 25000 रूपये के जुर्माने के साथ खारिज की जाती है। यह पैसा चार सप्ताह में दिल्ली विधि सेवा प्राधिकरण के पास जमा कराया जाए।’’

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