नई दिल्ली, 23 सितंबर हेस्टर बायोसाइंस लिमिटेड ने बुधवार को कहा कि उसने डेयरी उद्योग को भारी नुकसान पहुंचाने वाले ब्रुसेलोसिस बीमारी को नियंत्रित करने के लिए सरकार के अनुसंधान निकाय आईसीएआर- आईवीआरआई से एक नई पीढ़ी का टीका विकसित करने की तकनीक हासिल कर ली है।
इस प्रौद्योगिकी को आईसीएआर-आईवीआरआई (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद - भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान) के वैज्ञानिक - डॉ पल्लब चौधरी और उनकी टीम के द्वारा विकसित किया गया था।
एक नियामकीय सूचना में, हेस्टर ने कहा कि ‘‘इसने ब्रूकेला एबोर्टस एस 19 डेल्टा पेर वैक्सीन विकसित करने के लिए आईसीएआर-आईवीआरआई से स्वदेशी रूप से विकसित तकनीक प्राप्त करने के समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।’’
डॉ त्रिलोचन महापात्र, सचिव (डीएआरई) और महानिदेशक (आईसीएआर) की उपस्थिति में 22 सितंबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।
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हेस्टर ने कहा कि वह मौजूदा समय में पारंपरिक ब्रुसेला एबोर्टस S19 टीके का निर्माण कर रही है और वह सभी राज्यों को इसकी आपूर्ति कर रही है। एस-19 डेल्टा-पेर नई पीढ़ी का टीका संवर्धित सुरक्षा, रोग प्रतिरोधक के साथ ब्रुसेला वैक्सीन विकसित करने की दिशा में एक कदम आगे होगा, साथ ही बछड़े को एक ही बार देने से उसके अंदर आजीवन प्रतिरक्षा का आश्वासन बना रहेगा।
सरकार ने टीकाकरण के माध्यम से ब्रुसेला के खिलाफ पहले चरण में भारत में चार करोड़ बछियों का टीकाकरण करने की योजना बनाई है।
हेस्टर ने कहा, ‘‘ब्रुसेला पूरी दुनिया में आर्थिक महत्व रखने वाला एक रोग है। यह न केवल मवेशी, भेड़, बकरी और सूअर को प्रभावित करता है, बल्कि यह मनुष्यों में भी फैलता है। संयोग से ब्रुसेला के खिलाफ मनुष्यों की रक्षा के लिए कोई टीका उपलब्ध नहीं है। इंसानों की रक्षा करने के लिए जानवरों को संरक्षित करने की आवश्यकता है। ब्रुसेला टीका के साथ टीकाकरण से मवेशियों को भी स्वस्थ रहने में मदद मिलती है, जिससे उनके दूध उत्पादन में सुधार होता है।
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