नयी दिल्ली, 13 जून समुद्र विज्ञानियों ने एक नए अध्ययन में दावा किया है कि 2010 के दशक में आर्कटिक महासागर में गर्मी के प्रवाह में वृद्धि दर्ज की गई है और इसके लिए उन्होंने उप-आर्कटिक या आर्कटिक के दक्षिण से आने वाले गर्म पानी के प्रवाह को जिम्मेदार ठहराया है।
उन्हें समुद्र के प्रवाह की मात्रा में वृद्धि के प्रमाण भी मिले हैं, जो प्रशांत और अटलांटिक महासागर से आर्कटिक क्षेत्र में गर्म पानी के प्रवाह के लिए जिम्मेदार हैं।
इसके बाद उन्होंने आर्कटिक और उप-आर्कटिक महासागरों के बीच बहने वाले पानी का विश्लेषण करने वाले वर्तमान शोध की समीक्षा की।
वैज्ञानिकों ने कहा कि अन्य परिवर्तनों से संकेत मिलता है कि हो रहे जलवायु परिवर्तन से आर्कटिक महासागर में बनने वाले समुद्री बर्फ की मात्रा में कमी आई है और प्रशांत महासागर से कम लवणता वाले पानी के प्रवाह के कारण आर्कटिक लवणता घटी है।
जर्मनी के ब्रेमेरहेवन में ‘अल्फ्रेड वेगेनर इंस्टीट्यूट हेल्महोल्ट्ज सेंटर फॉर पोलर एंड मरीन रिसर्च’ में वरिष्ठ वैज्ञानिक कियांग वांग अध्ययन पत्र के पहले लेखक हैं।
इस अध्ययन के निष्कर्ष ‘‘ओशियन-लैंड-एटमॉस्फियर रिसर्च’’ नामक पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं।
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