नयी दिल्ली, 11 दिसंबर तृणमूल कांग्रेस के सदस्य जवाहर सरकार और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के बीच सोमवार को राज्यसभा में उस समय तीखी बहस हो गई जब उन्होंने पुरी से पूछा कि यूक्रेन संघर्ष के बीच सस्ते रूसी कच्चे तेल के आयात से निजी तेल कंपनियों को कितना ‘मुनाफा’ हुआ।
इसके बाद सभापति जगदीप धनखड़ को हस्तक्षेप करना पड़ा और उन्होंने दोनों सदस्यों को निर्देश दिया कि वे पूर्व में इस मुद्दे पर उनके बीच आदान-प्रदान किए गए पत्रों को सदन के पटल पर रखें।
प्रश्नकाल के दौरान सरकार ने पूछा कि दो निजी तेल कंपनियों ने रूस के सस्ते तेल के आयात से कितना ‘मुनाफा’ कमाया। इस पर पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के सदस्य ने उन्हें कई पत्र लिखे हैं और हर पत्र में उन्होंने यही सवाल पूछा है।
पुरी ने कहा कि वह सरकार के हर सवाल का जवाब दे रहे हैं और तृणमूल कांग्रेस सदस्य के साथ उनके पत्रों के आदान-प्रदान का रिकॉर्ड सार्वजनिक करने के लिए भी तैयार हैं।
इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच शब्दों के तीखे प्रहार हुए जिसके बाद सभापति ने कहा कि दोनों के बीच आदान-प्रदान का रिकॉर्ड सदन में पेश किया जाए।
धनखड़ ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि यह जनहित में होगा कि सदस्य द्वारा भेजा गया पत्र और मंत्री की ओर से आया जवाब, दोनों को यहां पेश किया जाए।’’
सरकार ने आरोप लगाया है कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां रूस से सस्ते तेल का लाभ उठाने में असमर्थ थीं क्योंकि वे दीर्घकालिक अनुबंधों से बंधी थीं, जबकि दो निजी तेल कंपनियों ने ‘रॉक बॉटम स्पॉट’ कीमतों पर तेल खरीदकर भारी मुनाफा कमाया।
सरकार ने पूछा, ‘‘उन्होंने (निजी तेल कंपनियों) कितना लाभ कमाया?’’
पुरी एलपीजी सब्सिडी से संबंधित पूरक सवालों का जवाब दे रहे थे।
उन्होंने लिखित जवाब में कहा, ‘‘भारत दुनिया की एकमात्र प्रमुख अर्थव्यवस्था रहा है, जहां पिछले दो वर्षों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी आई है।’’
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