नयी दिल्ली, 16 फरवरी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय पंजीकरण, आवंटन और प्रक्रिया के अन्य पहलुओं के लिए समान दिशा-निर्देशों को तय करने के वास्ते राज्यों के परामर्श से ‘एक राष्ट्र, एक अंग आवंटन’ नीति पर काम कर रहा है। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी।
एक आधिकारिक सूत्र ने कहा, एक समान नीति से, ‘‘देश के किसी भी अस्पताल में मृतक दाताओं से प्रतिरोपण से मरीजों की मदद हो सकेगी।’’
नीति को मजबूत करने की दिशा में काम करते हुए, मंत्रालय ने पहले ही राज्यों को प्रतिरोपण प्रक्रियाओं के लिए मृतक दाताओं के अंग लेने वालों को पंजीकृत करने के लिए मूल निवास की शर्त को हटाने की सिफारिश की है।
इसके अलावा, इसने मृतक दाताओं के अंग प्राप्त करने वाले रोगियों के पंजीकरण के लिए 65 वर्ष की आयु सीमा को समाप्त कर दिया है।
राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रतिरोपण संगठन (एनओटीटीओ) ने दिशानिर्देशों में आवश्यक बदलाव किए हैं जो अब 65 वर्ष और उससे अधिक आयु के रोगियों को मृत दाताओं से अंग प्राप्त करने के लिए खुद को पंजीकृत करने की अनुमति देता है।
आधिकारिक सूत्रों ने बृहस्पतिवार को बताया कि इसके अलावा, यह देखते हुए कि कुछ राज्य ऐसे रोगियों के पंजीकरण के लिए 5,000 से 10,000 रुपये के बीच शुल्क ले रहे हैं, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने उनसे यह कहते हुए पैसे नहीं लेने को कहा है कि यह मानव अंगों और ऊतकों के प्रतिरोपण नियम, 2014 के प्रावधानों के खिलाफ है।
सूत्रों ने बताया कि सरकार इस मुद्दे के बारे में स्कूली बच्चों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए कक्षा 9 या 11 में अंग दान पर एक पाठ्यक्रम शुरू करने पर काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों की तुलना में भारत में मृतक अंग दान की दर बहुत कम है और समय पर अंग प्रतिरोपण से अनुमानित रूप से पांच लाख लोगों की जान बचाई जा सकती है।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY