जरुरी जानकारी | एचडीएफसी बैंक ने संभवतया कार ऋण के साथ जीपीएस उपकरण को जोड़ा
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. देश के दूसरे सबसे बड़े निजी बैंक एचडीएफसी बैंक के वाहन ऋण कारोबार में गड़बड़ियों की खबरों के बारे में सूत्रों का कहना है कि बैंक ने ग्राहकों को वाहन ऋण के साथ जीपीएस उपकरण की खरीद करनों को संभवत: मजबूर किया जो बैंकिंग
नयी दिल्ली, 21 जुलाई देश के दूसरे सबसे बड़े निजी बैंक एचडीएफसी बैंक के वाहन ऋण कारोबार में गड़बड़ियों की खबरों के बारे में सूत्रों का कहना है कि बैंक ने ग्राहकों को वाहन ऋण के साथ जीपीएस उपकरण की खरीद करनों को संभवत: मजबूर किया जो बैंकिंग
उनका कहना है कि इस बैंक में 2015 से 2019 तक ऐसा चलता रहा।
सूत्रों के अनुसार यह जीपीएस उपकरण कथित तौर पर एक विशेष कंपनी ने बनाए थे। इस तरह यह बैंकिंग नियमन कानूनों के उल्लंघन और हितों के टकराव का मामला बनता है।
सूत्रों के मुताबिक चार साल में ग्राहकों को पर अतिरिक्त बोझ पड़ा। यह उपकरण 18,000 से 20,000 रुपये तक का था। जिन लोगों ने इस जीपीएस उपकरण की खरीद से मना किया अमूमन उन्हें ऋण देने से मना कर दिया गया।
यह भी पढ़े | बिहार में आकाशीय बिजली गिरने से 10 लोगों की मौत, सीएम नीतीश कुमार ने जताया शोक.
इस मुद्दे पर एचडीएफसी बैंक के प्रवक्ता ने कहा, ‘‘ हम अभी इस मसले को देख रहे हैं। इस बारे में बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी आदित्य पुरी बैंक के शेयर धारकों की सालाना बैठक को भी संबोधित कर चुके हैं। इसलिए अभी इस बारे में और कुछ नहीं कहा जा सकता।’’
पुरी ने शनिवार को बैंक की सालाना आम बैठक में कहा था कि वाहन ऋण कारोबार के कुछ कर्मचारियों के खिलाफ ‘निजी स्तर पर कदाचार को लेकर ‘अनुशासनात्मक कार्रवाई’ की गयी है।
व्हिसिलब्लोअर की शिकायतों के बाद जांच में सामने आयी ‘हितों के टकराव’ की बात से पुरी ने इंकार किया। उन्होंने कहा, ‘‘इस जांच कुछ कर्मचारियों के समूह द्वारा निजी स्तर पर कदाचार का पक्ष भी सामने आया जिनके खिलाफ उपयुक्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की गयी है।’’
बैंकिंग नियमन अधिनियम 1949 के हिसाब से बैंक अपने मूल काम के अलावा कुछ विशेष तरह के कारोबार ही कर सकते हैं। इन्हें 15 व्यापक उप श्रेणियों में परिभाषित किया गया है। साथ ही स्पष्ट उल्लेख है कोई भी बैंकिंग से जुड़ी कंपनी इससे इतर किसी और तरह के काम में संलग्न नहीं हो सकती है।
उपरोक्त गड़बड़ियों के आरोप लगने के बाद बैंक ने अपने वाहन ऋण कारोबार के पूर्व प्रमुख को कार्यकाल विस्तार देने से मना कर दिया। जबकि मार्च में सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें दो बार सेवा विस्तार दिया गया था।
बैंक के कुल खुदरा ऋण कारोबार में वाहन ऋण कारोबार की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत है, जबकि बैंक की संपूर्ण परिसंपत्ति में यह दसवें हिस्से के बराबर की हिस्सेदारी रखता है।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)