नयी दिल्ली, 12 अक्टूबर जल की गुणवत्ता के परीक्षण के मद्देनजर हरियाणा सरकार ने अति आधुनिक 'चलित जल परीक्षण प्रयोगशाला वैन' की शुरुआत की है। यह वैन जल परीक्षण की बहु-आयामी प्रणाली से लैस है, जिसमें सेंसर और विभिन्न उपकरण लगे हैं। जल शक्ति मंत्रालय ने यह जानकारी दी।
हरियाणा राज्य में पानी की गुणवत्ता मुख्य रूप से पूरी तरह से घुलनशील ठोस पदार्थ (टीडीएस), फ्लोराइड, नाइट्रेट, लौह और क्षारीयता से प्रभावित है।
मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि 'जल जीवन मिशन' के तहत किए जा रहे कार्यों का उद्देश्य वर्ष 2024 तक प्रत्येक ग्रामीण आवास में नल द्वारा जल प्रदान करना है। इस मिशन के तहत काम काफी तेजी से किया जा रहा है और यह मिशन जल गुणवत्ता की निगरानी पर भी जोर देता है।
बयान के मुताबिक, स्थान का पता लगाने के लिए इस वैन में जीपीएस लगा है और जीपीआरएस/3जी कनेक्टिविटी के माध्यम से परीक्षण किए गए नमूनों के डेटा को एक केन्द्रीय जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के सर्वर को भेजा जा सकता है।
इस प्रयोगशाला वैन में एलईडी डिस्प्ले यूनिट के जरिए परीक्षण का नतीजा तुरंत सामने आ जाता है।
बयान के मुताबिक, यह वैन जल के नमूनों के पीएच, क्षारीयता, टीडीएस, कठोरता, अवशिष्ट क्लोरीन, जस्ता, नाइट्रेट, फ्लोराइड और सूक्ष्म जैविक परीक्षण जैसे विभिन्न जल गुणवत्ता के मापदंडों को मापने में सक्षम है।
यह चालित जल परीक्षण प्रयोगशाला वैन मौके पर ही जल गुणवत्ता समस्या की तुरंत पहचान करने में मदद करेगी।
वैन को करनाल के राज्य जल परीक्षण प्रयोगशाला में तैनात किया जाएगा जबकि इसका परिचालन पूरे राज्य में किया जाएगा।
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