हंदवाड़ा मुठभेड़: 21 वीं राष्ट्रीय राइफल्स ने सेना पदक से सम्मानित अधिकारी को खोया
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श्रीनगर, तीन मई आतंकवाद से मुकाबला करते हुए तीन दशक में 21 वीं राष्ट्रीय राइफल्स ने रविवार को कर्तव्य निर्वहन के दौरान अपना दूसरा कमांडिंग ऑफिसर (सीओ) खो दिया, जब दो बार सेना पदक से सम्मानित किये जा चुके कर्नल आशुतोष शर्मा ने बंधक बनाये गये लोगों को मुक्त कराने के लिये अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।

ब्रिगेड ऑफ गार्ड्स से अधिकारियों और जवानों को शामिल कर राष्ट्रीय राइफल्स (21-आरआर) ने 300 से अधिक आतंकवादियों को मार गिराने को लेकर ‘‘तीहरा शतक लगाने’’ का गौरव हासिल किया है।

उल्लेखनीय है कि 21 वीं राष्ट्रीय राइफल का गठन थल सेना ने जम्मू कश्मीर में आतंकवाद का मुकाबला करने के लिये किया है।

बटालियन ने अपना पहला कमांडिंग ऑफिसर कर्नल राजींदर चौहान के रूप में 21 अगस्त 2000 को खोया था।

इसके करीब 20 साल बाद कर्नल आशुतोष शर्मा रविवार सुबह उस वक्त शहीद हो गये, जब वह उत्तर कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में हंदवाड़ा तहसील के चंगीमुल्ला में आतंकवादियों का मुकाबला कर रहे थे।

पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने कहा कि कर्नल और उनकी टीम ने चंगीमुल्ला गांव में आतंकवादियों द्वारा बंधक बनाये गये लोगों को बहादुरी से मुक्त कराया।

कश्मीर में कमांडिंग ऑफिसर के तौर पर सेवा देने को लेकर दो बार सेना पदक से सम्मानित किये जा चुके कर्नल शर्मा को उनके सहकर्मी और वरिष्ठ अधिकारी सबसे खुशमिजाज अधिकारी के रूप में याद करते हैं, जो अपने जवानों के साथ वक्त बिताना पसंद करते थे।

कर्नल चौहान 2000 में उस वक्त शहीद हुए थे, जब वह ब्रिगेडियर बीएस शेर गिल के साथ अपने इलाके में गश्त पर थे।

आतंकवादियों ने जाचलदारा गांव के पास आईईडी में रिमोट कंट्रोल से विस्फोट किया, जिससे उनके वाहन के परखच्चे उड़ गये थे। दोनों अधिकारी मौके पर ही शहीद हो गये जबकि सेना के पांच अन्य जवान घायल हुए थे।

कर्नल चौहान को भी सेना पदक से सम्मानित किया गया था, जिन्होंने 20 साल से अधिक समय तक राष्ट्र की सेवा की। वह 21 वीं राष्ट्रीय राइफल्स के तीसरे सीओ थे।

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