नयी दिल्ली, 25 नवंबर पूर्व राजदूत एम.के. भद्रकुमार का कहना है कि हमास द्वारा इजराइल पर अचानक किए गए हमले ने फलस्तीन मुद्दे की ओर एक बार फिर ध्यान आकर्षित किया है।
भद्रकुमार ने यहां ‘इंडियन वीमेन प्रेस कोर’ में शुक्रवार शाम को एक परिचर्चा के दौरान यह बात कही।
उन्होंने कहा कि इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू व्यवस्थित तरीके से ‘एक-राष्ट्र’ समाधान की ओर बढ़ रहे हैं, लेकिन यह यहूदियों और फलस्तीनियों को साथ-साथ लेकर चलने वाला इजराइल नहीं है।
उज्बेकिस्तान और तुर्की में सेवा दे चुके पूर्व राजदूत ने कहा कि फलस्तीन मुद्दे का समाधान नहीं ढूंढना, आग से खेलने जैसा है।
जॉर्डन, लीबिया और माल्टा सहित अन्य देशों में भारत के दूत रहे अनिल त्रिगुणायत ने कहा कि जब हमास ने सात अक्टूबर को हमला किया, तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इजराइल का समर्थन किया।
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन, इजराइल का जवाबी हमला जारी है, जिसे दुनिया के अधिकांश पर्यवेक्षकों और देशों ने असंगत माना है। मेरा मानना है कि इस कदम से उनके द्वारा अर्जित की गई सहानुभूति खत्म हो गई है।’’
त्रिगुणायत ने कहा, ‘‘पिछले 15 से 20 सालों से फलस्तीनी मुद्दा ठंडे बस्ते में है। बहुत कम देश इस बारे में बात करेंगे। भारत ने फलस्तीन मुद्दे पर लगातार अपना रुख बरकरार रखा है, लेकिन अरब दुनिया में चीजें बदल रही हैं।’’
गाजा को मानवीय सहायता प्रदान करने के लिए संघर्षविराम की मांग करने वाले प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र महासभा में मतदान से दूर रहने के भारत के फैसले पर उन्होंने कहा कि भारत ने आतंकवाद का सामना किया है और इसके खिलाफ अपना रुख बरकरार रखा है।
पूर्व राजनयिक ने कहा, ‘‘भारत आज फलस्तीन मुद्दे का समग्र समाधान तलाश रहा है।’’
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