नयी दिल्ली, छह दिसंबर वैमानिकी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) स्वदेशीकरण की दिशा में अपने समग्र दृष्टिकोण के अनुरूप शोध एवं विकास (आर एंड डी) पर इस साल 2,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी।
एचएएल में निदेशक (इंजीनियरिंग और आर एंड डी) के निदेशक डॉ डी के सुनील ने कहा, ‘‘हम इस साल शोध एवं विकास गतिविधियों पर 2,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर रहे हैं।’’
एचएएल राजधानी में सात-आठ दिसंबर को आयोजित एक एक्सपो में विभिन्न प्रकार की वैमानिकी प्रणालियों के डिजाइन, विकास और उत्पादन में अपनी समृद्ध विरासत को प्रदर्शित करेगी।
पिछले कुछ दशक में एचएएल ने हल्के लड़ाकू विमान ‘तेजस’ और हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर ‘प्रचंड’ सहित कई सैन्य विमानों एवं हेलीकॉप्टरों का विकास किया है।
सुनील ने कहा, ‘‘हम यह दिखाना चाहते थे कि हम रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर’ होने की दिशा में क्या कर रहे हैं। एचएएल लंबे समय से इस दिशा में सक्रिय है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमने शोध एवं विकास में काफी निवेश किया है और हमारे पास इसका एक बहुत बड़ा ढांचा है। एचएएल के नौ आर एंड डी केंद्र हैं। हम इस पर काफी पैसा खर्च करेंगे।’’
उन्होंने कहा कि एचएएल अब वर्तमान और भविष्य की मांगों को पूरा करने के लिए वैमानिकी के महत्वपूर्ण घटकों के विकास की जरूरत पर स्पष्ट रूप से ध्यान केंद्रित कर रही है।
सुनील ने कहा कि ‘एवियोनिक्स एक्सपो 2023’ विमानन क्षेत्र के पेशेवरों, उद्योग जगत के नेताओं और हितधारकों के लिए एक केंद्र के रूप में काम करेगा। एक्सपो में एचएएल द्वारा डिजाइन और विकसित वैमानिकी उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला को प्रदर्शित किया जाएगा।
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