अहमदाबाद, दो जुलाई गुजरात उच्च न्यायालय ने कोरोना वायरस महामारी के मध्य सार्वजनिक स्थानों पर मास्क नहीं लगाने पर वर्तमान 1000 रूपये के जुर्माने को घटाकर 500 रूपये करने के राज्य सरकार के प्रस्ताव को शुक्रवार को ठुकरा दिया और कहा कि इस वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ प्रतिरोधक व्यवस्था होनी ही चाहिए।
महाधिवक्ता कमल त्रिवेदी ने जब जुर्माने की राशि घटाने पर जोर दिया तो न्यायमूर्ति बेला त्रिवेदी और न्यायमूर्ति भार्गव करिया की पीठ ने कहा कि जब राज्य की 50 फीसद जनसंख्या का कोविड-19 के विरूद्ध टीकाकरण पूरा हो जाएगा तब यह अदालत इस अनुरोध पर फैसला करेगी।
यह विशेष पीठ राज्य में कोरोना वायरस की स्थिति के संबंध में स्वत: संज्ञान लेकर एक जनहित याचिका की संबंधित याचिकाओं के साथ सुनवाई कर रही है।
शुक्रवार को डिजिटल सुनवाई के दौरान त्रिवेदी ने कहा कि कुछ महीने पहले उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद राज्य सरकार ने जुर्माना 500 रूपये से बढ़ाकर 1000 रूपये कर दिया था।
उन्होंने कहा, ‘‘ हमने ऐसा इसलिए किया था क्योंकि तब समय भिन्न था और लोगों में अनुशासन नहीं था, वे नियमों का पालन करने के लिए तैयार नहीं थे। लेकिन आज हमने पाया कि लोग नियमों का पालन कर रहे हैं, वे बातें मान रहे हैं इसलिए हमें अधिक उल्लंघन नजर नहीं आता है।’’
महाधिवक्ता ने कहा कि जुर्माना आधा करने का राज्य सरकार का अनुरोध लोगों की ‘लोकप्रिय मांग’ से प्रेरित है और यह कि ‘ निचले स्तर के लोगों के लिए’ इतना बड़ा जुर्माना भरना मुश्किल हो रहा है।
इस पर पीठ ने कहा, ‘‘ हमें अब भी कोरोना वायरस की तीसरी लहर की आशंका है। जबतक प्रतिरोधक व्यवस्था नहीं होगी, तबतक लोग अनुशासन में नहीं रहेंगे। कम से कम हमारी 50 फीसद जनसंख्या का टीकाकरण हो जाए, फिर हम जुर्माना आधा करने पर सोचेंगे।’’
मामले की अगली सुनवाई नौ जुलाई को होगी।
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