देश की खबरें | गुजरात उच्च न्यायालय ने मामला स्थानांतरित करने की पूर्व आईपीएस अधिकारी भट्ट की याचिका खारिज की

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. गुजरात उच्च न्यायालय ने जेल में बंद भारतीय पुलिस सेवा (आईपीसी) के पूर्व अधिकारी संजीव भट्ट की उस याचिका को बृहस्पतिवार को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने 1996 के मादक पदार्थ जब्ती मामले में अपने मुकदमे को किसी अन्य न्यायाधीश के पास स्थानांतरित करने का आग्रह किया था। अदालत ने कहा कि वह "कानूनी प्रक्रिया का लगातार दुरुपयोग’’ कर रहे हैं।

अहमदाबाद, 24 अगस्त गुजरात उच्च न्यायालय ने जेल में बंद भारतीय पुलिस सेवा (आईपीसी) के पूर्व अधिकारी संजीव भट्ट की उस याचिका को बृहस्पतिवार को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने 1996 के मादक पदार्थ जब्ती मामले में अपने मुकदमे को किसी अन्य न्यायाधीश के पास स्थानांतरित करने का आग्रह किया था। अदालत ने कहा कि वह "कानूनी प्रक्रिया का लगातार दुरुपयोग’’ कर रहे हैं।

न्यायमूर्ति समीर दवे ने कहा कि भट्ट की दोनों याचिकाएं खारिज की जाती हैं। न्यायाधीश ने कार्यवाही पर एक महीने की रोक लगाने के भट्ट के वकील की गुजारिश को भी नहीं माना।

भट्ट ने जून में अपने मुकदमे को पीठासीन न्यायाधीश के पास से वरिष्ठतम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत में स्थानांतरित करने के लिए बनासकांठा के प्रधान जिला और सत्र न्यायाधीश के समक्ष एक याचिका दायर की थी।

भट्ट ने दावा किया कि बनासकांठा जिले में एनडीपीएस मामलों के विशेष न्यायाधीश के रूप में कार्यरत वर्तमान न्यायाधीश का उनके प्रति "पक्षपातपूर्ण" रवैया है।

जब बनासकांठा सत्र न्यायाधीश ने उनकी याचिका खारिज कर दी तो उन्होंने प्रधान जिला न्यायाधीश का आदेश रद्द कराने और अपने मुकदमे की सुनवाई अन्य न्यायाधीश की अदालत में कराने का आदेश प्राप्त करने के लिए उच्च न्यायालय का रुख किया।

राज्य सरकार और मादक पदार्थ मामले के पीड़ित दोनों ने याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा कि ये याचिकाएं सुनवाई में देरी करने के लिए दायर की गई हैं। मामले में पीड़ित राजस्थान में वकालत करते हैं।

दोनों याचिकाएं खारिज करते हुए, न्यायमूर्ति समीर दवे ने कहा कि भट्ट "निचली अदालत से अनुकूल आदेश" नहीं मिलने की वजह से निचली अदालत के न्यायाधीश के खिलाफ "निराधार आरोप" लगा रहे हैं।

न्यायमूर्ति दवे ने अपने आदेश में कहा, “ यह सब यह सुनिश्चित करने के लिए किया गया था कि मामले में अंतिम बहस शुरू न हो। जैसा कि राज्य द्वारा बताया गया है कि (आईपीसी धारा) 302 से संबंधित दूसरे मामले में भी याचिकाकर्ता द्वारा यही तरीका अपनाया गया था जिसमें उन्होंने पीठासीन न्यायाधीश के खिलाफ निंदनीय आरोप लगाए थे।”

उन्होंने कहा, "इससे पता चलता है कि याचिकाकर्ता कानूनी प्रक्रिया का लगातार दुरुपयोग कर रहा है। उसके मन में न्यायिक प्रक्रिया के प्रति बहुत कम सम्मान है। अपराध कानून प्रणाली के प्रशासन के अपने ज्ञान को नकारात्मक तरीके से लागू करके, वह उक्त प्रणाली को पंगु बनाने की कोशिश कर रहा है।"

भट्ट को 2015 में सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। वह 1996 में बनासकांठा जिले में पुलिस अधीक्षक थे, जब एक होटल के उस कमरे से कथित रूप से मादक पदार्थ जब्त करने के बाद राजस्थान के वकील सुमेरसिंह राजपुरोहित को गिरफ्तार किया गया जिसमें वह ठहरे हुए थे।

राजस्थान पुलिस ने बाद में कहा कि राजपुरोहित को बनासकांठा पुलिस ने राजस्थान के पाली में स्थित एक विवादित संपत्ति को स्थानांतरित करने के वास्ते मजबूर करने के लिए फंसाया था।

भट्ट को हिरासत में मौत के एक मामले में दोषी ठहराया जा चुका है।

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