गोधरा, 23 जुलाई गुजरात में 2002 के गोधरा ट्रेन नरसंहार मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक दोषी को पैरोल से फरार रहने के एक साल बाद दाहोद (रिपीट) (दाहोद) जिले से गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने रविवार को यह जानकारी दी।
पुलिस ने एक विज्ञप्ति में बताया कि मुखबिर से सूचना मिली थी कि दोषी कासिम अब्दुल सत्तार दाहोद के लिमखेड़ा में मौजूद है। विज्ञप्ति के अनुसार, सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए पैरोल फरलो दस्ता शनिवार को वहां पहुंचा और सत्तार को गिरफ्तार किया।
विज्ञप्ति में बताया गया है कि सत्तार को सिटी बी. डिवीजन पुलिस को सौंप दिया गया है ताकि उसे उसकी शेष सजा काटने के लिए अहमदाबाद की साबरमती केंद्रीय जेल ले जाया जा सके।
सत्तार को 27 फरवरी, 2002 को गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस के दो डिब्बों में आग लगाने के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। इस घटना में 59 यात्रियों की मौत हुई थी और प्रतिक्रिया स्वरूप राज्य में सांप्रदायिक दंगे भड़क गए थे। दंगों में 1,200 से अधिक लोगों की मौत हुई थी।
पुलिस के मुताबिक, सत्तार को 2002 में गिरफ्तार किया गया था और उस पर हत्या, हत्या का प्रयास, डकैती, इरादतन क्षति पहुंचाने, लोक सेवक को डराने आदि से संबंधित भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं के साथ-साथ रेलवे अधिनियम और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान की रोकथाम अधिनियम की धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे।
जितेंद्र नरेश जितेंद्र नरेश
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