उन्होंने कहा कि सरकार इसे दैवीय घटना कहती है लेकिन ऐसे बयानों को कोई फायदा नहीं होगा और निवेशकों का विश्वास घटेगा । आम लोग सरकार की ओर देख रहे हैं ।
मारन ने जीएसटी के तहत राज्यों के हिस्से की राशि का मुद्दा भी उठाया । उन्होंने नोटबंदी के निर्णय को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा।
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के मिथुन रेड्डी ने आंध्र प्रदेश में पूर्ववर्ती तेलुगू देसम पार्टी की सरकार के समय शुरू की गयी एपी फाइबरनेट योजना में अनियमितता का आरोप लगाते हुए सीबीआई जांच की मांग की।
शिवसेना के अरविंद सावंत ने सरकार से मांग की कि एअर इंडिया के कर्मचारियों का ध्यान रखा जाना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के आंकड़े पता चलने चाहिए।
सावंत ने महाराष्ट्र में कोरोना वायरस के हालात को लेकर राजनीति होने का आरोप लगाते हुए कहा कि महाराष्ट्र में अच्छा काम हुआ है, लेकिन राज्य के भाजपा के सांसदों और विधायकों ने केवल पीएम केयर्स फंड में अनुदान दिया, लेकिन राज्य के आपदा कोष में सहायता राशि नहीं दी।
बीजद के भतृहरि महताब ने मांग उठाई कि कोविड-19 महामारी के बीच प्रवासी श्रमिकों का आंकड़ा सार्वजनिक होना चाहिए।
उन्होंने पूछा कि शहरी गरीबों के लिए सरकार ने क्या कार्यक्रम बनाये हैं।
बसपा के रितेश पांडेय ने कहा कि पूर्वांचल के बुनकरों के लिए अनुदान मांगों में कोई प्रावधान नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रवासी श्रमिकों, बेरोजगारी के आंकड़े सरकार को पेश करने चाहिए।
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि देश में सख्त लॉकडाउन हुआ, अर्थव्यवस्था की स्थिति खराब हुई, जीडीपी गिरी है। लेकिन सरकार ने जिस 20 लाख करोड़ रुपये का पैकेज की घोषणा की वो सिर्फ सुर्खियां बंटोरने के लिए था।
उन्होंने कहा कि सरकार को कांग्रेस और राहुल गांधी की सलाह मानकर गरीबों के खातों में 7500 रुपये मासिक भेजना चाहिए।
गोगोई ने कहा कि सरकार सिर्फ ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे लच्छेदार शब्दों का उपयोग कर रही है, लेकिन स्थिति में सुधार के लिए कुछ नहीं कर रही है।
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