पटना, 24 अप्रैल बिहार के सत्तारूढ़ महागठबंधन के सहयोगी दलों ने गैंगस्टर से नेता बने आनंद मोहन की रिहाई के वास्ते कथित रूप से निमयों में बदलाव करने पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की आलोचना करने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की सुप्रीमो मायावती की सोमवार को निंदा की।
पूर्व सांसद मोहन गोपालगंज के तत्कालीन जिलाधिकारी जी कृष्णैया की 1994 में की गयी हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। आईएएस अधिकारी कृष्णैया वर्तमान तेलंगाना के महबूबनगर के थे।
एक अदालत ने अक्टूबर, 2007 में मोहन को मृत्युदंड सुनाया था जिसे पटना उच्च न्यायालय ने दिसंबर 2008 में उम्रकैद में बदल दिया था। निचली अदालत के फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गयी थी।
नीतीश कुमार सरकार ने 10 अप्रैल को बिहार की जेल नियमावली में बदलाव किया और उन मामलों की सूची से ‘ड्यूटी पर तैनात जनसेवक की हत्या’ उपबंध को हटा दिया जिनमें जेल की सजा में माफी पर विचार नहीं किया जा सकता है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस संशोधन से मोहन की समय से पहले रिहाई हो सकती है। मोहन 15 सालों से सहरसा जेल में अपनी सजा काट रहा है।
जेल नियमावली को बदलने के कदम की आलोचना करते हुए उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने हाल में ट्वीट किया था, ‘‘ आंध्रप्रदेश (अब तेलंगाना) के महबूबनगर के दलित समुदाय के बेहद ईमानदार आईएएस अधिकारी की निर्मम हत्या के मामले में आनंद मोहन को रिहा करने के लिए नियमावली में बदलाव की नीतीश सरकार की तैयारी देशभर में दलित विरोधी कारणों से दलितों के बीच चर्चा का विषय है।’’
उन्होंने कहा कि देशभर में दलितों की भावनाएं इस कदम से आहत हुई हैं। इसे नीतीश कुमार की ‘अपराध के पक्ष में’ और ‘दलित के विरोध में ’ करार देते हुए मायावती ने बिहार सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है।
मायावती के आरोपों पर सत्तारूढ़ जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के नेता और राज्य के ग्राम विकास मंत्री श्रवण कुमार ने पीटीआई से कहा, ‘‘ समाज के सभी वर्गों के कल्याण को ध्यान में रखकर राजय सरकार द्वारा निर्णय लिये जाते हैं।’’
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