नयी दिल्ली, 21 दिसंबर दूरसंचार उद्योग के वैश्विक निकाय जीएसएम एसोसिएशन ने दूरसंचार विभाग (डीओटी) से कहा है कि उसे 6,000 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम फ्रीक्वेंसी बैंड के आवंटन पर काम शुरू करना चाहिए।
जीएसएमए ने विभाग को लिखे एक पत्र में कहा कि भविष्य में 5जी सेवाओं के विस्तार के लिए ऐसा करना जरूरी है।
सरकार ने 3300-3670 मेगाहर्ट्ज बैंड में स्पेक्ट्रम की नीलामी की है, जिसे मध्यम-बैंड के रूप में जाना जाता है। इसे 5जी सेवाओं के लिए सबसे उपयुक्त बैंड के रूप में पहचाना गया है।
जीएसएमए का अनुमान है कि 2025 से अगले पांच वर्षों तक 5जी की जरूरतों को पूरा करने के लिए मध्यम-बैंड के लिए कुल स्पेक्ट्रम की मांग लगभग 2000 मेगाहर्ट्ज प्रति बाजार होगी।
जीएसएमए ने कहा, ‘‘मौजूदा उपयोगकर्ताओं के कारण आईएमटी (5जी) के लिए 3.5 गीगाहर्ट्ज में सीमित स्पेक्ट्रम के कारण, कई सरकारें और नियामक उनके लिए छह गीगाहर्ट्ज बैंड में आवंटन करने पर विचार कर रहे हैं।’’
वैश्विक दूरसंचार निकाय के सदस्यों में रिलायंस जियो, भारतीय एयरटेल और वोडाफोन आइडिया शामिल हैं।
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