देश की खबरें | सरकार ‘पीएम श्री स्कूल’ स्थापित करेगी जो छात्रों को भविष्य के लिए तैयार करेंगे : धर्मेन्द्र प्रधान
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नयी दिल्ली, दो जून केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने बृहस्पतिवार को कहा कि सरकार ‘‘पीएम श्री स्कूल’’ स्थापित करने की प्रक्रिया में है जो छात्रों को भविष्य के लिए तैयार करने के उद्देश्य से पूरी तरह आधुनिक सुविधाओं से युक्त होंगे तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति की प्रयोगशाला होंगे।
गुजरात के गांधीनगर में देशभर के शिक्षा मंत्रियों के राष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन प्रधान ने यह बात कही ।
प्रधान ने कहा कि जब हम आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं तब ‘राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण 2021’ ने पठन-पाठन के स्तर एवं सीखने के परिणामों को बेहतर बनाने तथा शिक्षा की गुणवत्ता के मूल्यांकन को मजबूत बनाने में हमारे सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के गंभीर प्रयासों के प्रति विश्वास जगाया है।
उन्होंने कहा कि जब हम 21वीं सदी के अवसरों एवं चुनौतियों के लिये तैयारी कर रहे हैं तो ऐसे में हमें शिक्षा एवं कौशल से जुड़ी व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिये प्रौद्योगिकी का लाभ उठाना चाहिए।
शिक्षा मंत्री ने कहा, ‘‘हम नयी पीढ़ी को 21वीं सदी के ज्ञान एवं कौशल से वंचित नहीं रख सकते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हम ‘‘पीएम श्री स्कूल’’ स्थापित करने की प्रक्रिया में हैं जो छात्रों को भविष्य के लिए तैयार करने को लेकर पूरी तरह आधुनिक सुविधाओं से युक्त होंगे। ये अत्याधुनिक स्कूल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की प्रयोगशाला होंगे।’’
धर्मेन्द्र प्रधान ने भविष्योन्मुखी मानक मॉडल सृजित करने के लिये ‘‘पीएम श्री स्कूल’’ के लिये सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों एवं सम्पूर्ण शैक्षणिक तंत्र से सुझाव एवं राय देने का आग्रह किया ।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तथा सम्पूर्ण शिक्षा जगत से ‘पीएम श्री स्कूल’ के रूप एक भविष्योन्मुखी मानक मॉडल सृजित करने के लिये सुझाव एवं राय मांगता हूं । ’’
प्रधान ने कहा कि अगले 25 वर्ष भारत को ज्ञान आधारित ऐसी अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करने के लिये महत्वपूर्ण होंगे जो वैश्विक कल्याण के लिये प्रतिबद्ध हो।
विभिन्न राज्यों के शिक्षा मंत्रियों की उपस्थिति में उन्होंने कहा, ‘‘हम सभी को मिलकर काम करना है, एक दूसरे के अनुभवों और सफलताओं से सीखना है तथा भारत को और ऊंचाइयों पर ले जाना है।’’
प्रधान ने नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति में स्थानीय के महत्व के विषय को रेखांकित करते हुए कहा कि देश की सभी एं राष्ट्रीय एं हैं और कोई हिन्दी या अंग्रेजी से कमतर नहीं है।
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