जरुरी जानकारी | चिकित्सा उपकरणों की आयात निर्भरता कम करने के लिये सरकार ने उठाये कई कदम: गौड़ा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. सरकार ने चिकित्सा उपकरणों के आयात पर देश की निर्भरता को कम करने और इस क्षेत्र में घरेलू क्षमता के विकास के लिये कई उपाय किये हैं। रसायन एवं उर्वरक मंत्री डी वी सदानंद गौड़ा ने बृहस्पतिवार को इसकी जानकारी दी।

नयी दिल्ली, 20 अगस्त सरकार ने चिकित्सा उपकरणों के आयात पर देश की निर्भरता को कम करने और इस क्षेत्र में घरेलू क्षमता के विकास के लिये कई उपाय किये हैं। रसायन एवं उर्वरक मंत्री डी वी सदानंद गौड़ा ने बृहस्पतिवार को इसकी जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच व लागत में सुधार विशेषकर जांच और निदान के लिये सटीक उपकरणों, उपचार के लिये उन्नत सर्जिकल उपकरणों और स्वास्थ्य संकेतकों की निगरानी के लिये उपयुक्त उपकरणों की उपलब्धता में चिकित्सा उपकरण क्षेत्र की भूमिका महत्वपूर्ण है।

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गौड़ा ने 12वें सीआईआई मेडटेक ग्लोबल समिट के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा, हालांकि भारत तैयार चिकित्सा उपकरणों के साथ-साथ महत्वपूर्ण चिकित्सा उपकरण घटकों के मामले में आयात पर बहुत अधिक निर्भर है।

उन्होंने कहा, ‘‘भारतीय चिकित्सा उपकरण उद्योग का आकार लगभग 57 हजार करोड़ रुपये का है और इसमें आयात निर्भरता 41,400 करोड़ रुपये है। इसका मतलब है कि 85 प्रतिशत से अधिक आयात पर निर्भरता है जो कि काफी ज्यादा है। इसे ठीक करने की आवश्यकता है।’’

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उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में औषधि विभाग ने क्षेत्र में घरेलू क्षमता के विकास के लिये एक सक्षम वातावरण बनाने को लेकर कई उपाय किये हैं। देश की दवा सुरक्षा को मजबूत करने के लिये सरकार ने देश भर में तीन थोक दवा पार्क और चार चिकित्सा उपकरण पार्क के विकास की योजनाएं शुरू की हैं।

मंत्री ने कहा, "इन क्षेत्रों में आम बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिये केंद्रीय सहायता बढ़ाने के अलावा, केंद्र सरकार इन पार्कों में थोक दवाओं और चिकित्सा उपकरणों के निर्माताओं के लिये उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन (पीएलआई) का भी विस्तार करेगी।"

गौड़ा ने कहा कि ये योजनाएं घरेलू कंपनियों को विदेश में अन्य क्षेत्रों की कंपनियों की तरह प्रतिस्पर्धी बनाएंगी और घरेलू कंपनियों को एक स्तरीय मंच प्रदान करेंगी। दो से तीन साल की छोटी अवधि के भीतर सरकार की सही नीतियों के कारण, फार्मा सेक्टर केवल घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये ही नहीं, बल्कि कम लागत पर उच्च वैश्विक मांग को पूरा करने के लिहाज से भी आत्मनिर्भर बन जायेगा।

उन्होंने कहा, ‘‘यह हमारी दृष्टि है कि भारतीय चिकित्सा उपकरणों के उद्योग को न केवल आत्मनिर्भर बनाया जा सके बल्कि वैश्विक बाजार में भी अग्रणी भूमिका निभाई जा सके।"

उन्होंने कहा कि सरकार इस देश में प्रत्येक नागरिक को कम लागत वाली सस्ती स्वास्थ्य सेवा देने के लिए प्रतिबद्ध है, इसके लिये कई योजनाएं हैं।

गौड़ा ने कहा कि उनमें से कम लागत वाली दवाओं के लिये प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना और गरीब नागरिकों के कैशलेस स्वास्थ्य सेवा के लिये आयुष्मान भारत योजना मुख्य हैं।

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