नयी दिल्ली, 17 अगस्त हस्तशिल्प उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि खत्म किए गए अखिल भारतीय हस्तशिल्प बोर्ड की जगह जल्द से अधिक सक्रिय और प्रभावी इकाई लाई जानी चाहिए जिसमें हस्तशिल्पी समुदाय का प्रतिनिधित्व हो।
हस्तशिल्प बोर्ड की स्थापना 1952 में हुई थी जिसे अब खत्म कर दिया गया है। इसकी अंतिम बैठक 2016 में हुई थी।
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सांस्कृतिक कार्यकर्ता पुपुल जयकर द्वारा स्थापित परामर्श बोर्ड अंतिम दशक में अधिकांश समय एक तरह से निष्क्रिय रहा।
कपड़ा मंत्रालय ने इसे तीन अगस्त को खत्म कर दिया और कहा कि निर्णय ‘न्यूनतम शासन, अधिकतम सुशासन’ के सरकार के दृष्टिकोण के अनुरूप है।
बोर्ड की सदस्य रहीं बीना के. राव ने उम्मीद जताई कि अब कोई स्मार्ट इकाई लाई जाएगी।
उन्होंने कहा कि बोर्ड की अंतिम बैठक 2016 में हुई थी और इससे पहले भी स्थिति बहुत ज्यादा बेहतर नहीं थी।
राव ने पीटीआई- से फोन पर कहा, ‘‘कई बार बैठक साल में एक बार या दो साल में एक बार होती थी। दो साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद 2017 में बोर्ड का पुनर्गठन होना चाहिए था, लेकिन हमें कोई सूचना नहीं मिली।’’
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