नयी दिल्ली, नौ अगस्त संसद की समिति ने सिफारिश की है कि सरकार को उर्वरकों पर कर दरों को मौजूदा पांच प्रतिशत से कम करने के लिए जीएसटी परिषद को प्रस्ताव देना चाहिए।
रसायन और उर्वरक मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने बुधवार को संसद में रखी गई अपनी रिपोर्ट में कहा कि समिति को सूचित किया गया है कि उर्वरकों को 12 प्रतिशत जीएसटी के तहत रखा गया था। हालांकि, विभिन्न राज्यों की मांग पर उर्वरक पर जीएसटी घटाकर पांच प्रतिशत कर दिया गया।
उर्वरकों पर माल एवं सेवा कर (जीएसटी) को और कम करने का मुद्दा क्रमशः सितंबर 2021 और जून 2022 में आयोजित 45वीं और 47वीं बैठकों में जीएसटी परिषद के समक्ष रखा गया था। हालांकि, परिषद ने उर्वरकों या अन्य जैविक कृषि कच्चे माल की दरों में किसी भी बदलाव की सिफारिश नहीं की।
इसमें कहा गया है, ‘‘समिति सिफारिश करती है कि हमारे देश के किसानों के हित में उर्वरकों पर जीएसटी को और कम करने का मामला जल्द से जल्द जीएसटी परिषद के समक्ष रखा जा सकता है।’’
समिति ने कहा कि उर्वरकों पर पांच प्रतिशत जीएसटी लगाया जाता है और सल्फ्यूरिक एसिड और अमोनिया जैसे उसके कच्चे माल पर जीएसटी परिषद की सिफारिशों पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगाया जाता है।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘समिति इस विसंगति को समझने में विफल रही। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सल्फर जैसे उर्वरकों के कच्चे माल के कई उपयोग होते हैं और इसका उपयोग डिटर्जेंट, पेंट, डाई आदि के उत्पादन में भी किया जाता है। इसी तरह, अमोनिया के भी कई उपयोग होते हैं और इसका भी उपयोग रेफ्रिजरेटर गैस, प्लास्टिक, विस्फोटक, कपड़ा आदि के निर्माण के लिए किया जाता है।’’
समिति ने अपनी अन्य सिफारिशों में उर्वरक विभाग से देश में विभिन्न प्रकार के उर्वरकों, विशेषकर यूरिया की कमी को नियंत्रित करने और इस मामले में अधिक आत्मनिर्भर बनने के लिए सभी उपाय करने को कहा।
समिति ने सरकार से फॉस्फेटिक और पोटाश (पीएंडके) उर्वरकों के लिए वर्तमान पोषक तत्व आधारित सब्सिडी नीति की समीक्षा करने का आग्रह किया ताकि किसानों को यूरिया के बजाय अन्य उर्वरकों का उपयोग करने के लिए हतोत्साहित किया जा सके।
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