सरकार ने 4.55 लाख टन रिफाइंड पामतेल आयात का लाइसेंस रद्द किया
जमात

नयी दिल्ली, 12 मई सरकार ने मंगलवार को 4.55 लाख टन रिफाइंड पाम तेल आयात के लिए जारी किए गए सभी 39 लाइसेंस कोरद्द कर दिए हैं। इस ककदम का स्वागत करते हुए साल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन (एसईए) ने कहा कि इससे अवैध रूप से हो रहे सस्ते आयात पर अंकुश लगेगा और घरेलू तेलशोधक कंपनियों का बचाव होगा।

   खाद्य तेलों के अवैध आयात को रोकने के लिए, इस साल आठ जनवरी को रिफाइंड पामतेल आयात की प्रतिबंधात्मक सूची में डाल दिया गया था और कंपनियों को वाणिज्य मंत्रालय के तहत आने वाले विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) से आयात का लाइसेंस लेना आवश्यक बना दिया गया था।

डीजीएफटी ने 11 मई के एक कार्यालय ज्ञापन में कहा, ‘‘डीजीएफटी ने विभिन्न कंपनियों को आयात करने के लिए 39 लाइसेंस जारी किए थे ... वाणिज्य विभाग ने अपने फैसले की समीक्षा की है और इन सभी लाइसेंसों को रद्द करने का फैसला किया है।’’

ये 39 लाइसेंस,कुल 4,55,301 टन रिफाइंड पामतेल के आयात के लिए थे और इसमें से ज्यादातर मात्रा (2.93 लाख टन) नेपाल के रास्ते आयात होनी थी। नेपाल पामतेल का उत्पादन नहीं करता है। इसी तरह बांग्लादेश के रास्ते 12,000 टन और इंडोनेशिया के रास्ते 1.5 लाख टन पाम तेल का आयात होना था।

कई लाइसेंस पूर्वी भारत, विशेष रूप से पश्चिम बंगाल और बिहार में स्थित कंपनियों को जारी किए गए थे।

आधिकारिक ज्ञापन में, निदेशालय ने यह भी कहा कि यह संभव है कि इन लाइसेंसों के कारण कुछ आयात हुए भी हों।

सरकार के फैसले की सराहना करते हुए, मुंबई स्थित सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के कार्यकारी निदेशक बी वी मेहता ने कहा कि इंडोनेशिया और मलेशिया पामतेल के प्रमुख आपूर्तिकर्ता उेश हैं। लेकिन नेपाल और बांग्लादेश के रारस्ते शून्य आयात शुल्क पर अवैध रूप से इस तेल का आयात किया जाता है।

उन्होंने पीटीआई- को बताया कि अगर इस तरह के मार्गों से आयात की अनुमति दी जाती है, तो इससे सरकार को भारी मात्रा में राजस्व का नुकसान होता है। उन्होंने कहा कि एसईए ने ऐसे आयात को रोकने के संबंध में वार्णिज्य मंत्रालय को कई ज्ञापन दिये थे।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, लेटेस्टली स्टाफ ने इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया है)