देश की खबरें | झारखंड सरकार ने लेह में फंसे 60 प्रवासी मजूदरों को विमान के जरिए वापस लाने का प्रबंध किया
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लेह/ नयी दिल्ली, 29 मई सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा पैदल तय करके अपने घर लौटने को मजबूर हुए प्रवासी मजदूरों की मार्मिक कहानियों के बीच झारखंड सरकार ने शुक्रवार को लद्दाख में फंसे अपने राज्य के 60 श्रमिकों को विमान के जरिए वापस लाने की पहल करके एक उम्मीद की किरण दिखायी है।

ये सभी प्रवासी मजूदर लद्दाख में सीमा सड़क संगठन परियोजना में कार्यरत थे। दो महीने के तनाव और अनिश्चितता के बाद 60 मजदूरों का यह समूह विमान के जरिए दोपहर को नयी दिल्ली पहुंचा और फिर यहां से शाम को अपने गृह राज्य झारखंड की उड़ान में सवार हुआ।

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सोमवार से घरेलू यात्री उड़ान शुरू होने के बाद से कई ऐसे मामले सामने आए, जिसमें संस्थानों अथवा नियोक्ताओं ने फंसे हुए श्रमिकों को विमान के जरिए वापस भेजने का प्रबंध किया। यद्यपि, यह पहला मामला है, जब किसी राज्य सरकार ने एक साथ कई प्रवासी मजदूरों को वाणिज्यिक उड़ानों के जरिए लाने का प्रबंध किया हो।

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अधिकारियों ने कहा कि झारखंड के दुमका जिले के रहने वाले मजदूर कारगिल जिले के बटालिक में फंसे हुए थे। सभी मजदूरों को चिकित्सीय परीक्षण के बाद सीमा सड़क संगठन की सहायता से बृहस्पतिवार को लेह लाया गया और उन्हें शिविर में ठहराया गया।

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ट्वीट किया, '' हम अपने प्रवासी मजूदरों को सुरक्षित घर वापस लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमारी सरकार 60 मजदूरों को विमान के जरिए वापस ला रही है जोकि बटालिक-कारगिल में फंसे हुए थे। उन्हें लेह से रांची लाया जा रहा है।''

सोरेन ने गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर अंडमान-निकोबार, लद्दाख और उत्तर-पूर्वी राज्यों में फंसे प्रवासी मजदूरों को निजी विमान के जरिए वापस लाने की अनुमति देने की मांग की थी क्योंकि वहां से मजदूरों को वापस लाने के लिए कोई अन्य परिवहन सुविधा उपलब्ध नहीं है।

मुख्यमंत्री कार्यालय के एक सूत्र ने कहा, '' हालांकि, केंद्र की ओर से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर मुख्यमंत्री ने आगे बढ़कर प्रवासी मजदूरों को वापस लाने के लिए वाणिज्यिक उड़ानों का प्रबंध किया।''

उन्होंने कहा कि मजदूरों को वापस लाने के लिए करीब आठ लाख रुपये का खर्च आया।

सूत्र ने कहा कि मजदूरों का समूह स्पाइसजेट की उड़ान के जरिए लेह हवाईअड्डे से राष्ट्रीय राजधानी पहुंचा। फिर दिल्ली हवाईअड्डे से इंडिगो की उड़ान से छह बजे रांची के लिए उड़ान भरी।

लेह हवाईअड्डे से एक प्रवासी मजदूर जॉन पोलस हंसदा ने पीटीआई- को फोन पर कहा, '' हमारे कुछ लोग इस बात की उम्मीद खो चुके थे कि वे दोबारा अपने परिवार को देख सकेंगे लेकिन मैंने मजूदरों से कहा कि हम अपने गांव लौटेंगे। मैंने झारखंड सरकार से संपर्क किया, जिसने तत्काल प्रतिक्रिया दी और हमारी वापसी का प्रबंध किया।''

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