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देश की खबरें | सरकार खुलकर बोलने की आजादी पर अंकुश लगाने के लिये राजद्रोह कानून का इस्तेमाल कर रही है: मदन लोकुर

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश मदन बी लोकुर ने सोमवार को कहा कि जनता की राय पर प्रतिक्रिया के रूप में सरकार बोलने की आजादी पर अंकुश लगाने के लिये राजद्रोह कानून का सहारा ले रही है।

देश की खबरें | सरकार खुलकर बोलने की आजादी पर अंकुश लगाने के लिये राजद्रोह कानून का इस्तेमाल कर रही है: मदन लोकुर
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 14 सितंबर उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश मदन बी लोकुर ने सोमवार को कहा कि जनता की राय पर प्रतिक्रिया के रूप में सरकार बोलने की आजादी पर अंकुश लगाने के लिये राजद्रोह कानून का सहारा ले रही है।

न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) लोकुर ने ‘बोलने की आजादी और न्यायपालिका’ विषय पर एक वेबिनार को संबोधित करते हुये कहा कि बोलने की आजादी को कुचलने के लिये सरकार लोगों पर फर्जी खबरें फैलाने के आरोप लगाने का तरीका भी अपना रही है।

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उन्होंने कोरोना वायरस के मामले और इससे संबंधित वेंटिलेटर की कमी जैसे मुद्दों की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों पर फर्जी खबर के प्रावधानों के तहत आरोप लगाये जा रहे हैं।

न्यायमूर्ति लोकुर ने कहा, ‘‘सरकार बोलने की आजादी पर अंकुश लगाने के लिये राजद्रोह कानून का सहारा ले रही है। अचानक ही ऐसे मामलों की संख्या बढ़ गयी है जिसमें लोगों पर राजद्रोह के आरोप लगाए गए हैं। कुछ भी बोलने वाले एक आम नागरिक पर राजद्रोह का आरोप लगाया जा रहा है। इस साल अब तक राजद्रोह के 70 मामले देखे जा चुके हैं।’’

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इस वेबिनार का आयोजन कैंपेन फॉर ज्यूडिशियल एकाउन्टेबिलिटी एंड रिफार्म्स और स्वराज अभियान ने किया था।

अधिवक्ता प्रशांत भूषण के खिलाफ न्यायालय की अवमानना के मामले पर बोलते हुये उन्होंने कहा कि उनके बयानों को गलत पढ़ा गया।

उन्होंने डा. कलीफ खान के मामले का भी उदाहरण दिया और कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत आरोप लगाते समय उनके भाषण और नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ उनके बयानों को गलत पढ़ा गया।

वरिष्ठ पत्रकार एन राम ने कहा कि प्रशांत भूषण के मामले में दी गयी सजा बेतुकी है और उच्चतम न्यायालय के निष्कर्षो का कोई ठोस आधार नहीं है।

राम ने कहा, ‘‘मेरे मन में न्यायपालिका के प्रति बहुत सम्मान है। यह न्यायपालिका ही है जिसने संविधान में प्रेस की आजादी को पढ़ा। ’’

सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा राय ने कहा कि भूषण की स्थिति काफी व्यापक होने की वजह से लोगों का सशक्तीकरण हुआ है और इस मामले ने लोगों को प्रेरित किया है।

इस बीच, प्रशांत भूषण ने न्यायपालिका के प्रति अपमानजनक दो ट्वीट को लेकर अवमानना का दोषी ठहराये जाने के बाद सजा के रूप में एक रुपए का जुर्माना उच्चतम न्यायालय की रजिस्ट्री में जमा कराया है।

जुर्माना भरने के बाद मीडिया से बात करते हुये भूषण ने कहा कि उन्हें जुर्माना अदा करने के लिये के देश के सभी हिस्सों से योगदान मिला है और इस योगदान से ‘ट्रूथ फंड’ बनाया जायेगा जिससे असहमति व्यक्त करने की वजह से कानूनी कार्यवाही का सामना करने वालों को कानूनी मदद प्रदान की जाएगी।

अनूप

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(The above story first appeared on LatestLY on Sep 14, 2020 03:07 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).