खेल की खबरें | गावस्कर ने तटस्थ अंपायरों का समर्थन किया

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लंदन, 14 अगस्त  पूर्व दिग्गज बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने भारत और इंग्लैंड के बीच चल रही टेस्ट श्रृंखला में अंपायरिंग (इंग्लैंड के अंपायरों द्वारा) के स्तर की तारीफ की लेकिन कहा कि वह तटस्थ अंपायरों को देखना पसंद करेंगे।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने 1994 में टेस्ट मैचों में एक तटस्थ अंपायर जबकि 2002 में दोनों मैदानी अंपायरों का तटस्थ होना अनिवार्य कर दिया था।

कोविड-19 महामारी के दौरान यात्रा प्रतिबंधों को देखते हुए आईसीसी ने अस्थायी रूप से विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के सभी मैचों में घरेलू अंपायरों के इस्तेमाल की अनुमति दी थी।

भारत के इस पूर्व कप्तान ने दूसरे टेस्ट मैच के तीसरे दिन के खेल के दौरान कमेंट्री के दौरान कहा, ‘‘ मैं अब भी तटस्थ अंपायरों को देखना चाहूंगा क्योंकि जब आप दो-तीन समीक्षाओं (डीआरएस) को गंवा देते है तो कोई ऐसा फैसला हो सकता है जिससे मैच का रूख पलट जाये।’’

उन्होंने कहा, ‘‘पक्षपात के आरोप से बचने के लिए आपके पास तटस्थ अंपायर होने चाहिए।’’

गावस्कर ने कहा कि वह मौजूदा श्रृंखला और इससे पहले ऑस्ट्रेलिया तथा भारत में हुई श्रृंखलाओं में घरेलू अंपायरों द्वारा लिए गए फैसलों से खुश हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘इस श्रृंखला (भारत और इंग्लैंड के बीच) और ऑस्ट्रेलिया में अंपायरिंग की गुणवत्ता शानदार रही है। हालांकि हमारे (खेल) दिनों के बारे में मैं इसके बारे ज्यादा बात नहीं कर सकता।’’

माइकल गॉफ और रिचर्ड इलिंगवर्थ दूसरे टेस्ट में दो मैदानी अंपायर हैं जबकि रिचर्ड केटलबोरो और क्रिस ब्रॉड क्रमशः तीसरे अंपायर और मैच रेफरी हैं।

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