नयी दिल्ली, 17 जुलाई महात्मा गांधी की स्मृति में स्थापित किये गए राष्ट्रीय स्मारक और संग्रहालय ने अपनी मासिक पत्रिका ‘अंतिम जन’ का विशेष संस्करण प्रकाशित किया है जो हिंदुत्ववादी नेता विनायक दामोदर सावरकर को समर्पित है। पत्रिका में सावरकर को एक “महान देशभक्त” बताया गया है जिनका इतिहास में स्थान “गांधी से कम नहीं है।”
गांधी स्मृति और दर्शन समिति (जीएसडीएस) द्वारा हिंदी में प्रकाशित पत्रिका के जून संस्करण में आमुख पृष्ठ पर सावरकर की तस्वीर लगाई गई है। जीएसडीएस, संस्कृति मंत्रालय का एक संस्थान है और प्रधानमंत्री इसके अध्यक्ष हैं। पत्रिका में धार्मिक सहिष्णुता पर गांधी के लेखों से लिए गए आलेख प्रकाशित किये गए हैं।
इसके अलावा हिंदुत्व पर सावरकर के लेख और सावरकर पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा लिखे गए आलेख पुनः प्रकाशित किये गए हैं। गांधी स्मृति और दर्शन समिति, तीस जनवरी मार्ग पर स्थित बिरला हाउस में गांधी स्मृति का कामकाज देखती है।
यह वही स्थान है जहां नाथूराम गोडसे ने 30 जनवरी 1948 को गांधी की गोली मारकर हत्या कर दी थी। बाद में इसे संग्रहालय बना दिया गया था। जीएसडीएस, राजघाट पर स्थित स्मारक गांधी दर्शन का भी काम देखती है। पत्रिका में छपे वाजपेयी के आलेख का शीर्षक है ‘एक चिंगारी थे सावरकर।’
अंतिम जन के जून संस्करण में डॉ श्रीरंग गोडबोले का आलेख “वीर सावरकर महात्मा गांधी हत्या अभियोग”, डॉ (मेजर) मधुसूदन चेरेकर का लेख “गांधी एवं सावरकर का संबंध, उमेश चतुर्वेदी द्वारा लिखित “वीर सावरकर को ऐतिहासिक न्याय कब”, मृत्युंजय कुमार का आलेख “स्वतंत्रता की वेदी के दो फूल: गांधी और सावरकर” तथा अन्य लेखकों की कृतियां भी प्रकाशित की गई हैं।
जीएसडीएस के उपाध्यक्ष विजय गोयल ने पत्रिका के इस संस्करण की प्रस्तावना- ‘महान देशभक्त वीर सावरकर’ लिखी है। उन्होंने कहा, “विनायक दामोदर सावरकर एक महान देशभक्त, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, अदम्य साहसी, बेहतरीन लेखक और प्रखर वक्ता थे।
गोयल ने लिखा, “जब भी स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सर्वोच्च बलिदान की बात की जाएगी, वीर सावरकर का नाम सम्मान और गरिमा के साथ लिया जाएगा।” जीएसडीएस उपाध्यक्ष ने सावरकर को बहुमुखी प्रतिभा का धनी, उच्च गुणवत्ता वाला लेखक और एक राष्ट्रवादी विचारक करार दिया। महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार गांधी ने अक्टूबर 2019 में कहा था कि सावरकर, गांधी की हत्या की योजना के “संरक्षक” थे।
उन्होंने दावा किया था कि महात्मा गांधी की हत्या में मुकदमे का सामना करने वाले सावरकर को बरी कर दिया गया था लेकिन अदालत ने उन्हें निर्दोष करार नहीं दिया था।
गोयल अपनी प्रस्तावना में लिखते हैं, “दुख होता है कि जिन्होंने एक दिन भी जेल में नहीं गुजारा, राष्ट्र के लिए कष्ट नहीं उठाए, देश और राष्ट्र के लिए कुछ नहीं किया, वह सावरकर जैसे देशभक्तों की आलोचना करते हैं जिसने बलिदान दिया।”
उन्होंने लिखा, “तब भी स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में सावरकर का स्थान और उनका सम्मान गांधी से कम नहीं है।”
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