जरुरी जानकारी | रीट, इनविट से 2021-22 में जुटाया गया कोष 59 प्रतिशत घटकर 22,145 करोड़ रुपये पर

नयी दिल्ली, एक मई दुनियाभर में फैली अनिश्चितता और शेयर बाजारों में उठापटक की वजह से निवेश के उभरते साधनों रियल एस्टेट निवेश न्यास (रीट) एवं अवसंरचना निवेश न्यास (इनविट) के जरिये धन जुटाने की गतिविधियां वित्त वर्ष 2021-22 में करीब 59 फीसदी गिरकर 22,145 करोड़ रुपये पर आ गईं।

बाजार नियामक सेबी के पास उपलब्ध आंकड़ों से पता चलता है कि रीट एवं इनविट के जरिये जुटाए गए धन में तीव्र गिरावट आई है। वित्त वर्ष 2020-21 में इन साधनों से 54,731 करोड़ रुपये जुटाए गए थे। लेकिन 31 मार्च, 2022 को समाप्त वित्त वर्ष में यह आंकड़ा सिर्फ 22,145 करोड़ रुपये ही रहा।

यह रकम प्रारंभिक पेशकश, तरजीही आवंटन, संस्थागत आवंटन और राइट्स निर्गम के जरिये जुटाई गई। सेबी के मुताबिक जुटाई गई कुल रकम में गैर-सूचीबद्ध इनविट की तरफ से जुटाई गई राशि भी शामिल है।

इन दोनों निवेश साधनों से वित्त वर्ष 2021-22 में जुटाए गए कुल 22,145 करोड़ रुपये में से 21,195 करोड़ रुपये इनविट्स के माध्यम से ही जुटाए गए थे। इनमें रीट का हिस्सा सिर्फ 950 करोड़ रुपये का ही रहा है।

रीट और इनविट भारत में निवेश के अपेक्षाकृत नए साधन हैं लेकिन वैश्विक बाजारों में काफी लोकप्रिय हैं। रीट वाणिज्यिक परिसंपत्तियों का पोर्टफोलियो होता है जिसका बड़ा हिस्सा पहले ही पट्टे पर होता है। वहीं इनविट में राजमार्ग एवं बिजली पारेषण जैसे बुनियादी ढांचे की संपत्तियों का पोर्टफोलियो होता है।

वेबसाइट माईवेल्थग्रोथ डॉट कॉम के सह-संस्थापक हर्षद चेतनवाला ने कहा, ‘‘दुनियाभर में अनिश्चितता और शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जैसे कुछ कारणों से हाल के दिनों में इन निवेश साधनों से धन जुटाने की गति धीमी रही है।’’

उन्होंने आगे कहा कि संस्थागत निवेशकों सहित कई निवेशक मौजूदा स्थिति का आकलन करना चाहेंगे और एक बार समग्र चीजें व्यवस्थित होने के बाद निवेश के बारे में सोच सकते हैं।

ट्रू बीकॉन और जेरोधा के सह-संस्थापक निखिल कामत ने कहा, ‘‘संभवतः मुद्रास्फीति और भारत में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के खराब रिकॉर्ड के कारण ‘फंडिंग’ सूख गई है। बढ़ती मुद्रास्फीति और पूंजी की लागत बढ़ने के कारण रियल एस्टेट और ढांचागत परियोजनाओं में मार्जिन कम होना तय है।’’

वहीं ट्रेडस्मार्ट के चेयरमैन विजय सिंघानिया का मानना ​​है कि निवेश साधनों से कोष तभी जुटाया जाना चाहिए जब वह आसानी से उपलब्ध हो, न कि जरूरत पड़ने पर।

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