स्वतंत्रता सेनानी, गांधीवादी हेमा भराली का निधन
यहां पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
गुवाहाटी, 29 अप्रैल स्वतंत्रता सेनानी और गांधीवादी हेमा भराली का वृद्धावस्था संबंधी समस्याओं के कारण बुधवार की सुबह उनके निवास पर निधन हो गया। वह 101 साल की थीं। भराली महिलाओं के उत्थान और हाशिए पर पड़े लोगों के सशक्तिकरण के प्रयासों के लिए जानी जाती हैं।
यहां पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
असम के राज्यपाल जगदीश मुखी ने दिग्गज स्वतंत्रता सेनानी के निधन पर शोक व्यक्त किया और कहा कि राज्य ने एक प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता और एक गांधीवादी को खो दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘उनका जीवन और कार्य राज्य में वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।’’
असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने भी उनके निधन पर अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की।
उन्होंने कहा, ‘‘प्रसिद्ध गांधीवादी नेता, स्वतंत्रता सेनानी और पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित हेम भाराली के निधन की खबर सुनकर बहुत दुख हुआ। शोक संतप्त परिजनों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदना।’’
उन्नीस फरवरी 1919 को जन्मी भराली को 2005 में पद्मश्री मिला था। 2006 में, उन्हें राष्ट्रीय सांप्रदायिक सद्भाव पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
उन्हें असम सरकार से राष्ट्रीय एकता के लिए फखरुद्दीन अली अहमद मेमोरियल अवार्ड भी मिला है।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, लेटेस्टली स्टाफ ने इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया है)