देश की खबरें | लॉकडाउन के दौरान हमला करने वाले चार पुलिसकर्मियों की पहचान कर ली गयी है: महाराष्ट्र सरकार
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मुम्बई, 23 जुलाई महाराष्ट्र सरकार ने बृहस्पतिवार को बंबई उच्च न्यायालय को सूचित किया कि इस साल मार्च में विले पार्ले में कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन को लागू करने के दौरान 22 साल के एक व्यक्ति पर कथित रूप से हमला करने वाले चार पुलिसकर्मियों की उसने पहचान की है।
बांद्रा के सहायक पुलिस आयुक्त द्वारा तैयार रिपोर्ट उच्च न्यायालय को सौंपी गयी। उसमें कहा गया है कि सीसीटीवी फुटेज में 29 मार्च की रात को चार पुलिस कांस्टेबल इस व्यक्ति पर हमला करते हुए नजर आते हैं।
मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति अनुजा प्रभुदेसाई की खंडपीठ वकील फिरदौस ईरानी की याचिका पर सुनवाई कर रही है। अदालत ने लॉकडाउन के दौरान ईरानी पर और उनके परिवार पर हमला समेत पुलिस की कथित ज्यादतियों पर चिंता प्रकट की है।
ईरानी ने शहर के दो मामलों का हवाला दिया है जहां लॉकडाउन लागू कर रहे पुलिसकर्मियों के कथित अत्यधिक बलप्रयोग के चलते दो व्यक्तियों की जान चली गयी।
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एक मामला का संबंध 22 वर्षीय राजू देवेंद्र की मौत से जुड़ा है जिसके परिवार ने आरोप लगाया कि 29 मार्च को जब वे लोग अपने रिश्तेदार के यहां जा रहे थे तब पुलिस ने उनका पीछा किया और देवेंद्र को पकड़ लिया।
ईरानी ने याचिका में कहा कि पुलिसकर्मियों ने कथित रूप से रिश्तदारों का बताया कि वे देवेंद्र को जुहू थाने ले जा रहे हैं। लेकिन अगले दिन पुलिस ने परिवार को बताया कि देंवेंद्र समीप के एक चौक पर लेटा मिला और जब उसे अस्पताल ले जाया गया जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।
शुरू में पुलिस ने दावा किया कि कुछ लोगों ने डकैती करने का संदेह कर देवेंद्र के साथ बुरी तरह मार-पीट की और वह मर गया।
बृहस्पतिवार को रिपोर्ट पर गौर करने के बाद अदालत ने कहा कि चार पुलिस कांस्टेबलों की पहचान की गयी है जिन्होंने 29 मार्च की रात को देवेंद्र पर कथित रूप से हमला किया और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई का प्रस्ताव रखा गया है।
ईरानी के अनुसार दूसरा मामला 18 अप्रैल को दक्षिण मुम्बई में सगीर जमाल खान की पुलिस पिटाई से जुड़ा है । खान शाम को घर लौटा और कहा कि उसपर पुलिस ने हमला किया। बाद में वह बेहोश हो गया और अस्पताल में उसे मृत घोषित कर दिया गया।
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