जरुरी जानकारी | सेबी के पूर्व चेयरमैन ने फोरेंसिंक ऑडिट के खुलासे को लेकर चिंता जतायी

मुंबई, 16 दिसंबर भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पूर्व चेयरमैन एम दामोदरन ने बुधवार को कंपनियों के लिये फोरेंसिक ऑडिट को सार्वजनिक किये जाने को अनिवार्य किये जाने से जुड़े हाल में किये गये नियामकीय बदलाव को लेकर चिंता जतायी। उन्होंने कहा कि समय से पहले खुलासा उतना ही नुकसादायक हो सकता है, जितना कि खुलासा नहीं होना।

कंपनी मामलों के चर्चित वकील तथा एजेडबी एंड पार्टनर्स के प्रबंध भागीदार जिया मोदी ने भी मौजूदा व्यवस्था को कठोर बताया और कहा कि जिस मकसद के लिये यह कदम उठाया गया है, वह संभवत: इससे पूरा नहीं होगा।

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बाजार नियामक सेबी ने इस साल अक्टूबर में सभी सूचीबद्ध कंपनियों के लिये फोरेसिंक ऑडिट को अनिवार्य कर दिया। इसके तहत कंपनियों को फोरेंसिक ऑडिट शुरू होने के साथ, उसके कारण, ऑडिट करने वाली इकाई और अंतिम रिपोर्ट को सार्वजनिक करना अनिवार्य किया गया है।

शेयर बाजार नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के कार्यक्रम दामोदरन और मोदी दोनों ने संकेत दिया कि अगर इस तरह के प्रावधान को अमल में लाया जाता है, इससे न केवल लोगों की प्रतिष्ठा धूमिल होगी बल्कि शेयर के दाम पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है। हालांकि गड़बड़ी करने वालों से कड़ाई से निपटना जरूरी है लेकिन अगर व्यक्ति ऑडिट के बाद पाक-साफ घोषित होता है, उसे हुए नुकसान की भरपाई करना कठिन होगा।

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दोमोदरन ने पूर्व सतर्कता आयुक्कत के साथ बातचीत का हवाला देते हुए कहा कि नौकरशाहों के खिलाफ 95 प्रतिशत आरोप सही साबित नहीं होते। वहीं मोदी ने कहा कि उनकी विधि कंपनी ने जिन मामलों में जांच शुरू की, उनमें 70 प्रतिशत मामलों में गड़बड़ी की बात नहीं पायी गयी, जबकि उनके खिलाफ गलत गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगे थे।

मोदी ने कहा, ‘‘सेबी ने पिछले महीने सूचीबद्धता समझौतों के तहत एक प्रावधान को प्रभाव में लाया। मुझे लगता है कि यह कठोर है और उससे वे उद्देश्य पूरे नहीं होंगे, जो सेबी चाहता है।’’

फिलहाल कंपनी संचालन को लेकर परामर्श सेवा दे रहे दामोदरन ने इस संदर्भ में अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों पर ध्यान देने की जरूरत बतायी।

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