देश की खबरें | पूर्व कानून मंत्री ने इंडिया का नाम बदलकर ‘भारत’ करने के विचार को बताया ‘‘मूर्खतापूर्ण’
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बेंगलुरु, चार जून कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री एम वीरप्पा मोइली ने इंडिया का नाम बदलकर ‘भारत’ या ‘हिंदुस्तान’ करने के विचार को बृहस्पतिवार को ‘‘मूर्खतापूर्ण’’ बताया और कहा कि इसका कोई खास महत्व नहीं है।

कर्नाटक भाजपा ने भी कहा है कि ऐसा प्रस्ताव ‘‘न तो पार्टी की तमन्ना और न ही उसकी इच्छा’’ है।

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भारत के पूर्व सॉलिसिटर जनरल और उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश एन संतोष हेगड़े ने भी नाम बदलने के सुझाव की आलोचना करते हुए आगाह किया कि इस कदम से देश में ‘‘अन्य समूहों के भीतर’’ अवांछित गलतफहमियां पैदा हो सकती हैं।

उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को केन्द्र से कहा कि संविधान में संशोधन करके देश का नाम इंडिया से बदलकर ‘भारत’ या ‘हिन्दुस्तान’ करने के लिये दायर याचिका को प्रतिवेदन के रूप में ले।

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प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति ऋषिकेश राय की पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से इस मामले की सुनवाई करते हुये याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि संविधान में इंडिया को पहले ही ‘भारत’ बुलाया जाता है।

यह याचिका दिल्ली में रहने वाले एक व्यक्ति ने दायर की थी और उसका दावा था कि औपनिवेशिक अतीत से पूरी तरह नागरिकों की मुक्ति सुनिश्चित करने के लिये यह संशोधन जरूरी है। याचिका में दावा किया गया था कि इंडिया के स्थान पर इसका नाम ‘भारत’ या ‘हिन्दुस्तान’ होने से यह देशवासियों के मन में अपनी राष्ट्रीयता के प्रति गौरव का संचार करेगा।

पीठ की अनिच्छा को देखते हुये वकील ने इस संबंध में संबंधित प्राधिकारी को प्रतिवेदन देने की अनुमति मांगी। इस पर पीठ ने कहा कि याचिका को संबंधित प्राधिकारी को प्रतिवदेन के रूप में लेना चाहिए।

इस पर एक सवाल के जवाब में कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री मोइली ने ‘पीटीआई-’ से कहा, ‘‘मूर्खतापूर्ण। इसकी क्या जरूरत है? हम पहले ही कई वर्षों से अपने लोकतंत्र में जी रहे हैं। लोगों के मन में निश्चित तौर पर मौजूदा नाम के लिए भावनाएं हैं। नाम बदलने के विचार से केवल अशांति पैदा होगी।

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