देश की खबरें | डीयूएसआईबी के पूर्व सीईओ ने स्थानांतरण के संबंध में बताए गए कारणों से इनकार किया

नयी दिल्ली, चार जनवरी दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी) के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के. महेश ने उपराज्यपाल वी के सक्सेना द्वारा उनके स्थानांतरण के लिए बताए गए कारणों का बुधवार को खंडन किया।

महेश ने यह भी कहा कि उनके खिलाफ कार्रवाई के संबंध में उन्हें स्पष्टीकरण देने का अवसर दिया जाना चाहिए था। उपराज्यपाल द्वारा 23 दिसंबर को आईएसबीटी कश्मीरी गेट के रैन बसेरों का औचक निरीक्षण करने और वहां आवास तथा शौचालय सुविधाओं की कमी पाए जाने के बाद महेश को पिछले सप्ताह विशेष निदेशक के रूप में केंद्र शासित प्रदेश सिविल सेवा में स्थानांतरित कर दिया गया था।

यमुना पुश्ता क्षेत्र में रैन बसेरों में कुल क्षमता 600 के मुकाबले 5,000 बेघर लोग रहते हैं, उपराज्यपाल के इस बयान का महेश ने खंडन किया। उन्होंने दावा किया कि 23 दिसंबर को जब उपराज्यपाल ने औचक निरीक्षण किया, उस क्षेत्र में रैन बसेरों में सामूहिक रूप से कुल 2,115 लोगों (1,865 को नियमित रैन बसेरे में और 250 लोगों को अस्थायी रैन बसेरे में) को समायोजित किया जा सकता था।

उपराज्यपाल ने यह भी कहा था कि महेश द्वारा ‘‘कर्तव्यों में लगातार लापरवाही’’ के परिणामस्वरूप एक नर्सरी परियोजना में तीन महीने की देरी हुई है।

मुख्य सचिव को पत्र लिखकर महेश ने दावा किया कि नर्सरी विकसित करने की जिम्मेदारी डीयूएसआईबी की नहीं बल्कि दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की है। उन्होंने कहा कि शौचालय खंड को स्थानांतरित करने में देरी डीडीए की ‘‘निष्क्रियता’’ के कारण हुई।

सक्सेना ने 23 दिसंबर को आईएसबीटी और आसपास के हनुमान मंदिर क्षेत्र में रैन बसेरों का औचक दौरा किया था और इन आश्रयों में व्यवस्था और सुविधाओं का जायजा लिया था। उन्होंने दावा किया था कि रैन बसेरों में साफ-सफाई और शौचालय की कमी है, जिससे लोग खुले में शौच करने को मजबूर हैं।

उपराज्यपाल ने आगे कहा था कि कागज, प्लास्टिक की प्लेट और कप खुले में फेंके जाने के कारण आईएसबीटी और आसपास के हनुमान मंदिर क्षेत्र में आश्रय गृहों में साफ-सफाई का अभाव था।

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