देश की खबरें | ईआईए अधिसूचना का प्रारूप सार्वजनिक सुनवाई की प्रक्रिया को शिथिल नहीं करता: जावड़ेकर
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नयी दिल्ली, छह अगस्त केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बृहस्पतिवार को वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश से कहा कि पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) अधिसूचना का प्रारूप सार्वजनिक सुनवाई की प्रक्रिया को शिथिल नहीं करता, बल्कि इसका उद्देश्य इसे और अधिक सार्थक बनाने का है।
जावड़ेकर ने रमेश द्वारा विभिन्न अवसरों पर ईआईए प्रारूप पर उठाई गई आपत्तियों के जवाब में पूर्व पर्यावरण मंत्री को पत्र लिखा।
रमेश वर्तमान में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मामलों की संसद की स्थायी समिति के अध्यक्ष हैं।
जावड़ेकर ने यह भी कहा कि रमेश की आपत्तियां और पत्र ‘‘समय पूर्व’’ हैं क्योंकि ईआईए प्रारूप पर सार्वजनिक विमर्श की प्रक्रिया जारी है।
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रमेश ने 25 जुलाई को पर्यावरण मंत्री को अपने पत्र में लिखा था कि ईआईए प्रारूप किसी परियोजना का काम पूरा होने के बाद भी स्वीकृति की अनुमति देता है जो पर्यावरण मंजूरी से पहले होने वाले मूल्यांकन और सार्वजनिक भागीदारी के सिद्धांतों के प्रतिकूल है।
जावड़ेकर ने कहा, ‘‘काम पूरा होने के बाद मंजूरी का प्रावधान भारी जुर्माना लगाकर उल्लंघन करने वाले सभी को नियामक व्यवस्था के अधीन लाने के लिए है। कंपनियां लगातार बिना नियमन की स्थिति में नहीं रह सकतीं।’’
केंद्रीय मंत्री ने लिखा, ‘‘प्रत्येक परियोजना विस्तार के लिए पर्यावरण प्रबंधन योजना अभिवेदन की आवश्यकता होगी। प्रारूप सार्वजनिक भागीदारी की प्रक्रिया को कम करने के लिए नहीं, बल्कि इसे और अधिक सार्थक बनाने के लिए है।’’
टि्वटर पर पत्र की प्रति साझा करते हुए जावड़ेकर ने दूसरा पत्र सार्वजनिक करने के लिए रमेश की आलोचना भी की।
रमेश ने अपने दूसरे पत्र की प्रति ट्वीट करते हुए कहा था कि वह अब भी जवाब का इंतजार कर रहे हैं।
इसके कुछ घंटे बाद, जावड़ेकर ने ट्वीट कर जवाब दिया, ‘‘आज सुबह ही मैंने आपको 25 जुलाई के आपके पत्र का विस्तृत जवाब भेजा है जो आपके घर स्थित कार्यालय पहुंच चुका है, तब भी आपने यह (दूसरा) पत्र लिखा और इसे टि्वटर पर साझा किया।’’
जावड़ेकर ने रमेश को भेजे गए अपने पत्र की प्रति साझा करते हुए ट्वीट किया, ‘‘मैं आज का पत्र एक बार फिर यहां साझा कर रहा हूं।’’
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