देश की खबरें | जैव चिकित्सा अपशिष्ट के निस्तारण के लिए सीपीसीबी के निर्देशों का पालन करें : बंबई उच्च न्यायालय

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एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

मुंबई, 24 जुलाई बंबई उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि महाराष्ट्र सरकार और नगर निकाय कोविड-19 मरीजों की जांच और उनके पृथक-वास के दौरान निकले जैव चिकित्सा अपशिष्ट के निस्तारण पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के दिशा निर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य है।

मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति माधव जामदार की खंडपीठ ने राज्य सरकार, महाराष्ट्र राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर निकायों को चिकित्सा अपशिष्ट के निस्तारण के लिए दिशा निर्देशों का पालन करने का निर्देश दिया।

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अदालत ने कहा, ‘‘यह सुनिश्चित करना राज्य सरकार का सर्वोपरि कर्तव्य है कि हर नागरिक का जीवन सुरक्षित हो और कोविड-19 वैश्विक महामारी से और कोई मौत न हो।’’

उसने कहा कि सीपीसीबी ने महामारी के मद्देनजर स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित करने के लिए 10 जून को दिशा निर्देश जारी किए थे।

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पीठ डोम्बिवली निवासी किशोर सोहोनी की उनकी वकील साधना कुमार के जरिए दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में कल्याण डोम्बिवली महानगरपालिका (केडीएमसी) द्वारा सड़कों पर फेंकी गई इस्तेमाल हो चुकी पीपीई किट्स जैसे चिकित्सा अपशिष्ट पर चिंता जताई गई।

एमपीसीबी की ओर से पेश वकील शर्मिला देशमुख ने अदालत को बताया कि इस घटना को लेकर केडीएमसी को एक नोटिस भेजा गया है।

अदालत ने कहा, ‘‘राज्य सरकार और सभी अन्य पक्षकार (नगर निकाय) कोविड-19 मरीजों की जांच और पृथक-वास के दौरान निकले कचरे के निस्तारण पर सीपीसीबी द्वारा जारी दिशा निर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य हैं।’’

उच्च न्यायालय ने याचिका का निस्तारण करते हुए कहा कि अगर कोई भी नगर निकाय लापरवाही करते पाया जाए तो एमपीसीबी उसके खिलाफ उचित कार्रवाई करें।

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