देश की खबरें | किसानों के प्रदर्शन स्थल पर अग्निशमन कर्मियों ने लगाया गोल गप्पा लंगर
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 25 दिसंबर अग्निशमन कर्मी सुरेंद्र कंबोज और उनके मित्रों ने नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली के सिंघू बार्डर पर किसानों के प्रदर्शनस्थल पर शुक्रवार को देखा कि एक बच्चा गोल गप्पा खाना चाहता था लेकिन उसके पास पैसे नहीं थे। वहीं, गोल गप्पा बेचने वाले की बिक्री नहीं हो पा रही थी क्योंकि लोग लंगर में खा रहे थे।

ऐसे में कंबोज और उनके मित्रों ने विक्रेता से सभी गोल गप्पे खरीद लिए और उन्हें वहां प्रदर्शन कर रहे लोगों के बीच मुफ्त बांट दिया।

हरियाणा के सिरसा के सात अग्निशमन कर्मियों के दल ने क्रिसमस के दिन सिंघू बार्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों के बीच मुफ्त गोल गप्पा बांटा।

सुरेंद्र कंबोज और उनके मित्रों ने यह अनूठा कदम तब उठाया जब उन्होंने बिक रहे गोल गप्पों के पास एक बच्चे को घूमते हुए देखा। कंबोज ने बच्चे से पूछा कि उसे क्या चाहिए।

कंबोज (33) के अनुसार उस बच्चे ने बताया कि उसे गोल गप्पे चाहिएं लेकिन उसके पास पैसे नहीं थे।

इसके बाद जो हुआ उससे वह बालक और किसान चकित रह गए।

कंबोज और रनिया अग्निशमन केंद्र में कार्यरत उनके अन्य मित्रों ने गोल गप्पे बेचने वाले से उसका पूरा स्टॉक खरीद लिया और वहीं गोल गप्पा लंगर शुरू कर दिया।

कंबोज के सहकर्मी रवींद्र कुमार ने कहा, ‘‘गोल गप्पे बेचने वाले ने कुछ भी नहीं कमाया था क्योंकि लोग लंगरों (सामुदायिक रसोई) में खाना खा रहे हैं। उसने अपना स्टॉक बेच दिया और हमें सेवा करने का मौका मिला। यह हर किसी के लिए लाभ की स्थिति थी।''

कुमार ने कहा कि प्रदर्शन कर रहे किसानों का समर्थन करने के लिए कुल सात अग्निशमन कर्मी आए हैं। उन्होंने कहा, "रनिया फायर स्टेशन में 21 कर्मियों की टीम है। हमने सिंघू बॉर्डर पर तीन दलों में आने का फैसला किया है।"

उन्होंने कहा कि स्टेशन के प्रमुख ने उन लोगों को विरोध प्रदर्शन में भाग लेने की अनुमति दी है। उन्होंने कहा कि हर तीन दिनों के बाद एक नया दल आएगा।

यह गोल गप्पा विक्रेता मोहम्मद सलीम के लिए भी क्रिसमस का चमत्कार था। सलीम ने कहा कि कंबोज ने उन्हें 1,000 रुपये दिए जो उम्मीद से अधिक थे। सलीम ने पिछले तीन दिनों में सिर्फ 500 रुपये कमाए थे।

एक अन्य अग्निशमन कर्मी दविंदर सिंह ने कहा, "हम सभी के पास अपने गांवों में खेती की जमीन है। हम सभी किसान हैं।"

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