नयी दिल्ली, 28 मई दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली जल बोर्ड से कहा है कि अनधिकृत कॉलोनियों में सेप्टिक टैंक से अपशिष्ट निकालने, उसे ले जाने और उसका निपटान करने के लिए विशेष मशीनों को खरीदने के लिए निविदा को जल्द से जल्द अंतिम रूप दे।
न्यायमूर्ति नवीन चावला ने निर्देश जारी करते हुए कहा कि इस काम में जनहित शामिल है और कोरोना वायरस महामारी के दौरान यह ज्यादा जरूरी है।nयह भी पढ़े | बाबरी मस्जिद विध्वंस मामला: 4 जून से ट्रायल होगा शुरू, कोर्ट लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती सहित 32 आरोपियों के बयान करेगा दर्ज.
इससे पहले बोर्ड ने अदालत से कहा था कि मार्च 2020 में निविदा दी जानी थी, लेकिन महामारी के कारण ऐसा नहीं हो सका। इसके बाद अदालत का आदेश आया।
अदालत ने कहा, "इस काम में जनहित शामिल है और असल में कोविड-19 महामारी के दौरान यह ज्यादा जरूरी है। प्रतिवादी संख्या दो (जल बोर्ड) को निर्देश दिया जाता है कि उक्त निविदा को जितनी जल्दी मुमकिन हो, उतनी जल्दी अंतिम रुप दें। "nयह भी पढ़े | कोरोना वायरस के पिछले 24 घंटों में मणिपुर में 11 नए मामले दर्ज : 28 मई 2020 की बड़ी खबरें और मुख्य समाचार LIVE.
अदालत ने यह निर्देश, एक याचिका पर सुनवाई के दौरान दिए हैं, जिसमें आरोप लगाया गया था कि पश्चिम दिल्ली के नजफगढ़ इलाके में सरकारी एजेंसियां या लाइसेंस धारक सेप्टिक टैंक में से अपशिष्ट लेकर उसे नजफगढ़ के नाले में डाल देते हैं और बाद में इसे बिना शोधित किए यमुना नदी में छोड़ दिया जाता है।
अदालत ने यह निर्देश भी दिया कि दिल्ली जल बोर्ड सेप्टिक प्रबंधन नियमावली, 2018 के तहत गठित समिति एक हफ्ते के अंदर आपात बैठक करे और याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए मुद्दों पर चर्चा करे तथा उनका समाधान करे।
उच्च न्यायालय ने जल बोर्ड से चार हफ्ते में एक रिपोर्ट दायर करने को कहा है जिसमें अदालत के आदेश के अनुपालन का संकेत हो। मामले को 29 जून को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया।
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