जरुरी जानकारी | पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने कहा, 11 राज्य, एक केंद्रशासित प्रदेश बिजली संशोधन विधेयक के खिलाफ

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (एआईपीईएफ) ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि 11 राज्यों एवं एक केंद्र शासित प्रदेशों ने बिजली संशोधन विधेयक, 2020 के प्रावधानों का विरोध किया है।

नयी दिल्ली, नौ जुलाई ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (एआईपीईएफ) ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि 11 राज्यों एवं एक केंद्र शासित प्रदेशों ने बिजली संशोधन विधेयक, 2020 के प्रावधानों का विरोध किया है।

एआईपीईएफ के अनुसार बिजली क्षेत्र में ‘तथाकथित सुधारों’ को लाने वाला बिजली (संशोधन) विधेयक 2020 से संघवाद के सिद्धांतों को खतरा है।

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एआईपीईएफ के प्रवक्ता वी के गुप्ता ने एक बयान में कहा, ‘‘बिजली मंत्रियों के तीन जुलाई को वीडियो कांफ्रेन्सिंग के जरिये सम्मेलन में 11 राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश ने बिजली (संशोधन) विधेयक, 2020 के मसौदे के कई उपबंधों को लेकर पुरजोर विरोध जताया और इसे लाने से मना किया।’’

जो राज्य विधेयक के प्रवाधानों का विरोध कर रहे हैं, वे केरल, तेलंगाना, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान और पंजाब हैं। वहीं केंद्रशासित प्रदेशों में पुडुचेरी ने इसका विरोध किया है।

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बयान के अनुसार पंजाब ने किसानों को मुफ्त बिजली देने की व्यवस्था समाप्त करने और उसकी जगह प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) योजना लाने के प्रस्ताव पर आपत्ति जतायी है। उसने नियामकीय आयोग के लिये सदस्यों की नियुक्ति हेतु पूरे देश में एक ही चयन समिति के प्रस्ताव का भी विरोध किया है क्योंकि सभी नियुक्तियां तब केंद्र सरकार के हाथों में होगी।

इसमें कहा गया है कि महाराष्ट्र के अनुसार विधेयक संविधान में मिली जिम्मेदारी और संघी ढांचे को कमजोर करता है।

बयान के अनुसार बिहार ने कहा है कि बिजली संविधान के समवर्ती सूची में है, ऐसे में नीतिगत मामलों में किसी भी प्रकार के संशोधन के संदर्भ में राज्यों की सहमति जरूरी है। बिहार बिजली वितरण कंपनियों के निजीकरण के पक्ष में नहीं है।

एआईपीईएफ के अनुसार राजस्थान ने प्रस्तावित बिजली (संशोधन) विधेयक, 2020 को संविधान की भावना के खिलाफ बताया है। उसने कहा है कि यह राज्यों के लिये शक्ति के विकेंद्रीकरण की धारणा के विपरीत है। बिजली क्षेत्र समवर्ती सूची में होने के बावजूद इसमें विद्युत क्षेत्र पर केंद्र के नियंत्रण पर जोर दिया गया है।

तमिलनाडु ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण योजना, निजीकरण/फ्रेंचाइजी तथा नवीकरणीय ऊर्जा खरीद बाध्यता के प्रावधानों का विरोध किया है।

बयान के अनुसार वहीं केरल ने कहा है कि बिजली क्षेत्र का निजीकरण उसके एजेंडे में नहीं होगा।

बिजली मंत्री आर के सिंह की अध्यक्षता में तीन जुलाई को बिजली मंत्रियों के सम्मेलन में राज्यों ने प्रस्तावित विधेयक के बारे में अपनी राय दी।

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