नयी दिल्ली, 24 जुलाई संसद की एक समिति ने नागर विमानन क्षेत्र के निकट भविष्य में तेजी से आगे बढ़ने की उम्मीद जताते हुए सरकार से सिफारिश की है कि वह हवाई अड्डों की सुरक्षा के लिए विशेष एजेंसी स्थापित किए जाने की व्यवहार्यता पर गौर करे।
परिवहन, संस्कृति और पर्यटन विभाग संबंधी स्थायी संसदीय समिति ने सोमवार को संसद में पेश अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) हवाई अड्डों पर सुरक्षा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और सीआईएसएफ द्वारा तैनात कुल 353 इकाइयों में से 66 इकाइयां (18.7 प्रतिशत) केवल हवाई अड्डों पर तैनात हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि समिति यह भी नोट करती है कि सुरक्षा प्रदान करने की सीआईएसएफ की जिम्मेदारी व्यापक दायरे में फैली हुई है, क्योंकि यह हवाई अड्डों सहित देश भर में 353 प्रतिष्ठानों को सुरक्षा प्रदान करता है।
इसमें कहा गया है, ‘‘यह भी ज्ञात है कि नागर विमानन क्षेत्र में तेजी से वृद्धि हुई है और निकट भविष्य में इसके तेजी से बढ़ने की उम्मीद है, जिससे विमान पत्तनों में सुरक्षा प्रदान करने के लिए तैनात जनशक्ति की आवश्यकता में वृद्धि होगी। इसलिए, समिति सिफारिश करती है कि गृह मंत्रालय के परामर्श से नागर विमानन मंत्रालय सिर्फ हवाई अड्डों के लिए विशेष सुरक्षा एजेंसी स्थापित करने की व्यवहार्यता की जांच करे।’’
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी सदस्य वी विजयसाई रेड्डी की अध्यक्षता वाली समिति की यह रिपोर्ट सोमवार को संसद में पेश की गई।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘पहले सीआईएसएफ की तैनाती की लागत का भुगतान संबंधित विमानपत्तन प्रबंधन या भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण (एएआई) द्वारा किया जाता था। नागर विमानन मंत्रालय ने 2019 में "राष्ट्रीय विमानन सुरक्षा शुल्क ट्रस्ट (एनएएसएफटी)" नाम से एक ट्रस्ट बनाया। एक जुलाई 2019 से सीआईएसएफ को तैनाती लागत का भुगतान एनएएसएफटी द्वारा सभी हवाई अड्डों के लिए केंद्रीय रूप से किया जाता है।’’
इसमें कहा गया है कि आज की तारीख में सीआईएसएफ के तहत 66 विमानपत्तनों के संबंध में तैनाती लागत की कुल बकाया राशि 4707 करोड़ रुपये से अधिक है।
समिति ने कहा कि सरकार ने 2008 से 21 ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा परियोजनाओं के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दी है जो देश में हवाई यातायात की बढ़ती मांग को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए और राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नीति, 2016 में निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अधिक संख्या में ग्रीनफील्ड हवाई अड्डों को विकसित करने की आवश्यकता है।
इसके मद्देनजर समिति ने सिफारिश की कि मंत्रालय को राज्य सरकारों और निजी हवाई अड्डा विकासकर्ताओं को ग्रीनफील्ड अड्डा परियोजनाओं को प्रस्तावित करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए और हवाई अड्डों के विकास में तेजी लाने के लिए इसकी स्वीकृति प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना चाहिए।
ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे को पारंपरिक रूप से खाली भूमि या अविकसित भूमि पर विकसित की जा रही विमानन सुविधा और एक हवाई अड्डे के रूप में संदर्भित किया जाता है।
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