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COVID-19 Spike: आंदोलनकारी किसान बोले- कोरोना के डर से भी प्रदर्शन नहीं रुक सकता

दिल्ली में कोविड-19 के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी के बावजूद किसान नेताओं ने बृहस्पतिवार को कहा कि कोरोना वायरस का डर भी उन्हें केंद्र के तीन नये कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन करने से नहीं रोक सकता.

COVID-19 Spike: आंदोलनकारी किसान बोले- कोरोना के डर से भी प्रदर्शन नहीं रुक सकता
किसान आंदोलन (Photo Credits: PTI)

नयी दिल्ली, नौ अप्रैल: दिल्ली में कोविड-19 के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी के बावजूद किसान नेताओं ने बृहस्पतिवार को कहा कि कोरोना वायरस का डर भी उन्हें केंद्र के तीन नये कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन करने से नहीं रोक सकता. किसान संगठन पिछले चार महीने से अधिक समय से बारिश, भीषण सर्दी और अब गर्मी में भी अपना आंदोलन चला रहे हैं. सर्दी के मौसम में प्रदर्शनकारी किसानों को गर्म कपड़ों की आपूर्ति की गयी, बारिश में जमीन से ऊंचाई पर उनके रहने का बंदोबस्त किया गया और अब गर्मी के लिए उन्होंने प्रदर्शन स्थलों पर छायादार ढांचे बनाना तथा एसी, कूलर और पंखों का बंदोबस्त शुरू कर दिया है. COVID-19: कोविड-19 के बढ़ते मामलों के कारण दिल्ली में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन स्थगित.

किसानों ने कहा कि कोविड-19 की दूसरी लहर से निपटना भी उनके लिए मुश्किल नहीं होगा. वे प्रदर्शन स्थलों पर बुनियादी सावधानियों के साथ इसके लिए भी तैयार हैं. ऑल इंडिया किसान सभा के उपाध्यक्ष (पंजाब) लखबीर सिंह ने कहा, ‘‘हम सिंघू बॉर्डर पर मंच से मास्क पहनने और हाथ बार-बार धोने की आवश्यकता के बारे में लगातार घोषणा कर रहे हैं. हम प्रदर्शनकारियों को टीका लगवाने के लिए भी प्रोत्साहित कर रहे हैं.’’

प्रदर्शन स्थलों पर अनेक स्वास्थ्य शिविर भी चल रहे हैं, ऐसे में बुखार या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण सामने आने पर प्रदर्शनकारियों को तत्काल चिकित्सा सहायता मिल सकती है. भारतीय किसान यूनियन (दाकौंडा) के महासचिव जगमोहन सिंह ने कहा, ‘‘अगर किसी को बुखार या खांसी है या कोविड का अन्य कोई लक्षण है तो यहां डॉक्टर देखते हैं और फैसला करते हैं. रोगी को या तो अस्पताल में भर्ती कराया जाता है या 8-10 दिन के लिए गांव वापस भेज दिया जाता है.’’

स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव के अनुसार किसान महामारी को ‘कुछ उदासीनता’ के साथ देखते हैं लेकिन अभी तक कोई प्रदर्शन स्थल कोविड-19 का हॉटस्पॉट नहीं है. उन्होंने कहा, ‘‘अगर आप देखेंगे तो इनमें से हर जगह डॉक्टर, क्लीनिक हैं. वे कोविड जांच नहीं कर रहे लेकिन अगर अधिक लोग बुखार या ऐसे लक्षणों की शिकायत करते हैं तो उन्हें पता चल जाएगा क्योंकि हर मोर्चा में योग्य डॉक्टर हैं.’’

यादव ने कहा, ‘‘उनमें से कुछ के तो अस्पताल हैं. अगर बुखार और सांस लेने में परेशानी बढ़ती है तो तत्काल ध्यान जाएगा.’’ उन्होंने कहा कि किसानों में मास्क पहनने और हाथ धोने की आदत कम हो रही है और दूरी भी नहीं रह पा रही और देश में अधिकतर स्थानों पर ऐसी ही स्थिति है.

उन्होंने कहा, ‘‘किसान अन्य किसी भारतीय नागरिक की तरह ही हैं. वे भी अन्य नागरिकों की तरह ही सतर्क हैं या अधिकतर नागरिकों की तरह असावधान हैं.’’

यादव ने कहा कि अगर सरकार प्रदर्शनकारी किसानों को हटाने के लिए कोरोना वायरस की आड़ लेती है तो इससे पश्चिम बंगाल में चल रहे चुनाव प्रचार को देखते हुए उनका ‘पाखंड’ ही सामने आएगा.

उन्होंने कहा, ‘‘ऐसी स्थिति में उन्हें बंगाल में चुनाव प्रचार बंद कर देना चाहिए. पहले तो उन्हें भाजपा की ही रैलियों को बंद कर देना चाहिए जहां गृह मंत्री भीड़ को संबोधित कर रहे हैं.’’

देशभर से और खासतौर पर पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से आये हजारों किसान पिछले साल नवंबर के आखिर से तीन नये कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं.

भारतीय किसान यूनियन (लाखोवाल) पंजाब के महासचिव परमजीत सिंह के अनुसार अगर किसान उस बीमारी से डरते भी हैं जो देश में पहले ही 1.6 लाख से अधिक लोगों की जान ले चुकी है तो उनके पास विकल्प भी क्या है.

उन्होंने कहा, ‘‘हमारी जान पहले ही खतरे में है. हम ठिठुरती सर्दी से डरे, गर्मी से डर रहे हैं और हां हम इस बीमारी से भी डरे हुए हैं लेकिन और कोई विकल्प नहीं है.’’

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(The above story first appeared on LatestLY on Apr 09, 2021 06:10 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).