जरुरी जानकारी | किसान नेताओं ने सरकार के साथ बैठक का किया बहिष्कार; बादल, सिंह ने कहा ‘अन्नदाता का अपमान’

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. पंजाब के किसान संगठनों ने बुधवार को नए कृषि कानूनों पर आंशकाओं के निराकरण के लिए केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा बुलाई गई एक बैठक का बहिष्कार किया, और सरकार पर दोहरी चाल चलने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि बैठक में कोई मंत्री उनकी सुनवाई के लिए उपस्थित नहीं था।

नयी दिल्ली, 14 अक्टूबर पंजाब के किसान संगठनों ने बुधवार को नए कृषि कानूनों पर आंशकाओं के निराकरण के लिए केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा बुलाई गई एक बैठक का बहिष्कार किया, और सरकार पर दोहरी चाल चलने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि बैठक में कोई मंत्री उनकी सुनवाई के लिए उपस्थित नहीं था।

जोगिंदर सिंह के नेतृत्व वाली भारती किसान संघ सहित, 29 किसानों के संगठनों, के प्रतिनिधि बैठक में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और उनके सहयोगी किसी मंत्री के उपस्थिति न होने से नाराज हो गए।

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किसी भी विरोध प्रदर्शन से बचने के लिए पुलिस सुरक्षा के बीच यह बैठक कृषि भवन में बुलाई गई थी। बैठक के बाद, उत्तेजित किसान प्रतिनिधियों को नारे लगाते तथा कृषि भवन के बाहर नए कृषि कानूनों की प्रतियां फाड़ते हुए देखा गया।

किसान प्रतिनिधियों के बैठक से वॉक आउट करने के बाद कुछ ही देर में पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और शिरोमणी अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने इस पर प्रतिक्रिया दी। दोनों नेताओं ने मंत्री की गैरमौजूदगी को ‘अन्नदाताओं का अपमान’ करार दिया।

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मुख्यमंत्री सिंह ने केंद्र सरकार को ‘किसानों के घाव पर नमक छिड़कने’ वाला और उनके प्रति ‘दुर्भावना’ रखने वाला बताया। वहीं बादल ने इसे पंजाब के लोगों, और किसानों की बुद्धिमता का अपमान करार दिया।

बैठक में भाग लेने बस में आये 30 से अधिक प्रतिनिधि, जिनमें ज्यादातर वरिष्ठ नागरिक थे, को कोविड-19 महामारी के बावजूद चेहरे पर मास्क नहीं पहने देखा गया।

सभी 29 किसान संगठनों की समन्वय समिति के सदस्य दर्शन पाल ने बैठक के बाद पीटीआई- को बताया, ‘‘कोई चर्चा ठीक से नहीं हो पायी। हमारी चिंताओं को सुनने के लिए न तो केंद्रीय कृषि मंत्री और न ही जूनियर मंत्री मौजूद थे। हमने पूछा कि मंत्री हमसे क्यों नहीं मिल रहे हैं, सरकार हमें यहां बुलाती है और मंत्रीगण पंजाब में आभासी बैठकें कर रहे हैं, इस तरह का दोहरा मानदंड क्यों अपनाया जा रहा है। तो इसका कोई समुचित जबाव नहीं मिला।’’

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