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देश की खबरें | मृतकों के परिजनों ने अहमदाबाद सिविल अस्पताल पर लगाया लापरवाही का आरोप

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. अहमदाबाद सिविल अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ने वाले कई मरीजों के रिश्तेदारों ने आरोप लगाया है कि डॉक्टरों और नर्सों की लापरवाही और उदासीनता की वजह से उनके परिजन की जान गई है।

देश की खबरें | मृतकों के परिजनों ने अहमदाबाद सिविल अस्पताल पर लगाया लापरवाही का आरोप
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अहमदाबाद, 28 मई अहमदाबाद सिविल अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ने वाले कई मरीजों के रिश्तेदारों ने आरोप लगाया है कि डॉक्टरों और नर्सों की लापरवाही और उदासीनता की वजह से उनके परिजन की जान गई है।

ये आरोप ऐसे समय में सामने आए हैं जब गुजरात उच्च न्यायालय ने कुछ दिन पहले ही कोरोना वायरस संकट के बीच इस अस्पताल के कामकाज के तरीकों की आलोचना की है।nयह भी पढ़े | कोरोना वायरस के पिछले 24 घंटों में मणिपुर में 11 नए मामले दर्ज : 28 मई 2020 की बड़ी खबरें और मुख्य समाचार LIVE.

अहमदाबाद में स्थित इस अस्पताल को एशिया का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल माना जाता है। यहां सैंकड़ों डॉक्टर और नर्स काम करते हैं।

एक व्यक्ति ने आरोप लगाया है कि डॉक्टरों ने उसकी 81 वर्षीय दादी को जिंदा रखने के लिए उसे पाइप को हाथ से दबाकर हवा भरते रहने को कहा था। बुजुर्ग की इसके कुछ देर बाद ही बुधवार को मौत हो गई।nयह भी पढ़े | Monsoon 2020: मानसून में नहीं होगी देरी, 1 जून से केरल में सक्रिय होने की मौसम विभाग ने की भविष्यवाणी.

हार्दिक वलेरा ने दावा किया कि डॉक्टरों ने उसकी दादी की कोविड-19 जांच करने की जहमत भी नहीं उठाई।

उन्होंने कहा, ‘‘ हमारा घर दानी लिम्डा क्षेत्र में स्थित है जो कि निषिद्ध क्षेत्र में आता है। हम मंगलवार रात में दादी को सिविल अस्पताल ले कर गए थे क्योंकि उन्हे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी।’’

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘ बुजुर्ग को पहले अस्पताल के भूतल पर रखा गया लेकिन बाद में मध्यरात्रि में उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया। लेकिन लगातार मेरे आग्रह के बाद भी डॉक्टरों ने कोविड -19 जांच के लिए उनका नमूना नहीं लिया।’’

वलेरा के अनुसार बुजुर्ग को जब तीसरी मंजिल के किसी अन्य वार्ड में बुधवार सुबह में भेजा जा रहा था तो ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर ने उन्हें एक थैला पकड़ाया और हाथ से तब तक हवा भरते रहने को कहा जब तक कि उन्हें वार्ड पर पहुंचने पर वेंटिलेटर पर न रख दिया जाए।

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘ जब मैंने कहा कि यह काम किसी पेशेवर का है और अस्पताल के ही किसी व्यक्ति को करना चाहिए तो किसी ने भी ध्यान नहीं दिया। कुछ ने तो इसके लिए मेरा मजाक भी उड़ाया। इस दौरान मैंने देखा कि हवा शुद्ध करने वाला फिल्टर फट गया है और मैने इसके बारे में बताया, लेकिन किसी ने भी मेरी बात पर ध्यान नहीं दिया। अंततः जब हम तीसरी मंजिल के वार्ड पर पहुंचे तो डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया और बचाने की कोई कोशिश भी नहीं की।’’

वहीं वलेरा के आरोप के बारे में जब अस्पताल के अधीक्षक डॉक्टर एम एम प्रभाकर से बात की गई तो उन्होंने कहा कि उन्हें याद नहीं है कि ऐसा कुछ अस्पताल में हुआ है।

एक अन्य घटना में भी कोरोना वायरस मरीज के एक रिश्तेदार ने एक वीडियो जारी किया है कि सिविल अस्पताल के कोविड-19 डॉक्टरों ने उनकी मां को वेंटिलेटर पर रखने से पहले उन्हें जानकारी नहीं दी थी। इस महिला की मौत 24 मई को हो गई।

इस वीडियो में एक व्यक्ति को एक डॉक्टर से बात करते हुए सुना जा सकता है, ‘‘ मुझे जानकारी क्यों नहीं दी गई कि मेरी मां को वेंटिलेटर पर रखा जाएगा। आपने उन्हें जब जबरन पाइप लगाया तो खून बहना शुरू हो गया और बाद में उनकी मौत हो गई। नियम के अनुसार आपको मुझे बताना चाहिए था कि उन्हें वेंटिलेटर पर रखा जाएगा।’’

इस घटना पर टिप्पणी करते हुए प्रभाकर ने कहा कि महिला कोविड-19 से संक्रमित थी और कुछ दिन पहले उनकी मौत हो गई।

प्रभाकर ने कहा कि तय नियमों और दिशानिर्देश के अनुसार एक मरीज का जीवन बचाने के लिए डॉक्टर को हर संभव उपाय करने का अधिकार है।

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(The above story first appeared on LatestLY on May 28, 2020 05:58 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).