अत्यधिक जनहित याचिकाओं पर प्रभावी प्रतिक्रिया की जरूरत है : कानून मंत्री रविशंकर
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नयी दिल्ली, 10 मई कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने रविवार को विधि अधिकारियों से कहा कि कोरोना वायरस की वजह से लागू लॉकडाउन जैसे मुश्किल समय में दायर अत्यधिक जनहित याचिकाओं पर प्रभावी प्रतिक्रिया की जरूरत है।

अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता सहित विधि अधिकारियों से वीडियो कांफ्रेंस के जरिये संवाद करते हुए प्रसाद ने कहा कि आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत केंद्र और राज्यों की ओर से जारी दिशानिर्देशों को लेकर फैसला लेने की प्रक्रिया पर भरोसा किया जाना चाहिए क्योंकि यह कई चरणों के विचार विमर्श के बाद सामने आता है जिसमें प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और केंद्र एवं राज्य के शीर्ष नौकरशाह शामिल होते हैं।

कानून मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, ‘‘ कानून मंत्री ने खासतौर पर रेखांकित किया कि इस चुनौतीपूर्ण समय में अत्याधिक जनहित याचिकाओं से बचने की जरूरत है। हालांकि, किसी को वाद दायर करने से रोका नहीं जा सकता है पर इस तरह के हस्तक्षेप में प्रभावी प्रतिक्रिया दी जानी चाहिए।’’

बैठक में सॉलिसिटर जनरल मेहता ने मामलों की प्रकृति और उच्चतम न्यायालय द्वारा समय-समय पर दिए गए फैसलों की जानकारी दी जिसमें केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों और कदमों को बरकरार रखा गया है।

बयान के मुताबिक यह महसूस किया गया कि महामारी की गंभीरता को देखते हुए वीडियो कांफ्रेंस के जरिये सुनवाई कुछ और समय के लिए जरी रहनी चाहिए।

प्रसाद ने इस चुनौती को अवसर के तौर पर लेने और न्याय प्रदान करने के लिए डिजिटल प्रणाली को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया।

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