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देश की खबरें | विशेषज्ञों ने वन्यजीवों के शिकार, व्यापार पर रोक को कड़ाई से लागू करने का किया अनुरोध

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देश की खबरें | विशेषज्ञों ने वन्यजीवों के शिकार, व्यापार पर रोक को कड़ाई से लागू करने का किया अनुरोध
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नयी दिल्ली, पांच जून वन्यजीव विशेषज्ञों ने कहा है कि केरल में एक गर्भवती हथिनी की मौत के बाद इंसानों की क्रूरता और हिंसा से पशुओं को बचाने के लिए अब जाग जाने का समय है। यह भी सुनिश्चित करना होगा कि वन्यजीव फिर से ऐसी नृशंस हरकतों का शिकार ना बने ।

शुक्रवार को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर विशेषज्ञों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जी 20 शिखर सम्मेलन में वन्य जीवों के कारोबार पर प्रतिबंध लगाने के लिए वैश्विक आह्वान का समर्थन करने को कहा ।

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उन्होंने कहा कि हाल में पटाखा भरा अनानस खाने के कारण केरल के पालक्कड़ में एक गर्भवती हथिनी की मौत से पूरे देश में आक्रोश है।

संदेह है कि साइलेंट वैली जंगल में 15 वर्षीय हथिनी ने पटाखा भरा हुआ अनानस खा लिया था और यह उसके मुंह में फट गया। एक सप्ताह बाद 27 मई को वेल्लियार नदी में हथिनी की मौत हो गयी।

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विशेषज्ञों ने कहा कि यह सुनश्चित करना चाहिए कि वन्य जीव फिर से ऐसी क्रूर हरकतों का शिकार ना बनें ।

वकील और पर्यावरणविद गौरव बंसल ने कहा, ‘‘वन्यजीव गलियारे को सुरक्षित करने के लिए तुरंत उपाए करने की जरूरत है। इससे उन्हें आगे बढ़ने में मदद मिलेगी । अभी इंसानों ने इस पर कब्जा कर रखा है। वे जंगलों की जैव विविधता की रक्षा करते हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘वन्यजीव गलियारे को सुरक्षित करने के लिए कुछ प्रावधान करने की जरूरत है। मानव-पशु संघर्ष को भी रोकना होगा। सरकार को कानून लाकर समुचित तरीके से इसे लागू करना चाहिए ।’’

पर्यावरण और वन्य जीव कार्यकर्ता गौरी मौलेखी ने कहा कि इंसान और जानवरों के बीच संघर्ष का मानवीय तरीके से समाधान करने की जरूरत है ।

उन्होंने कहा, ‘‘वन्यजीव वासों का संरक्षण करना बहुत जरूरी है । केरल में जंगली सूअर और हिमाचल प्रदेश में बंदरों का शिकार करने की अनुमति है । इसे रोकने की जरूरत है । इंसान-जानवरों के बीच संघर्ष का मानवीय तरीके से समाधान करने की जरूरत है।’’

मौलेखी ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री को दखल देना चाहिए और राज्यों को जानवरों की हत्या रोकना चाहिए । ’’

हिमाचल प्रदेश सरकार ने बंदरों को वन्य जीव (संरक्षण)कानून, 1972 की अनुसूची पांच (ऐसे जानवर जिनका शिकार किया जा सकता है) में और केरल सरकार ने जंगली सूअरों को भी इसी अनुसूची में रखा है ।

अंतरराष्ट्रीय संगठन वर्ल्ड एनिमल प्रोटेक्शन की भारतीय इकाई ने भी सरकार से वन्यजीवों के व्यापार को पूरी तरह प्रतिबंधित करने की अपील की है ।

एनजीओ ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि वे इस साल नवंबर में आयोजित होने वाले जी 20 शिखर सम्मेलन में देश का प्रतिनिधित्व करते समय वन्य जीव व्यापार पर रोक के लिए वैश्विक आह्वान का समर्थन करें।

वर्ल्ड एनिमल प्रोटेक्शन इंडिया के निदेशक गजेंद्र के शर्मा ने कहा, ‘‘इंसानों के फायदे के लिए हम लंबे समय तक वन्य जीवों के बेलगाम व्यापार के तथ्यों को नजरअंदाज नहीं कर सकते, इसका परिणाम कोविड-19 महामारी के रूप में मिला है । अगर हम अभी कदम नहीं उठाएंगे तो यह अंतिम महामारी नहीं होगी । वन्य जीव जंगल में रहते हैं । वह उनका प्राकृतिक वास होता है । ’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जी 20 शिखर सम्मेलन में वन्य जीव व्यापार पर वैश्विक स्तर पर प्रतिबंध का समर्थन करने की अपील करते हैं ।’’

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(The above story first appeared on LatestLY on Jun 05, 2020 06:35 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).