देश की खबरें | आबकारी नीति घोटाला: सिसोदिया ने अदालत में जमानत याचिका दायर की, कल होगी सुनवाई

नयी दिल्ली, तीन मई दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं आम आदमी पार्टी (आप) के नेता मनीष सिसोदिया ने कथित आबकारी नीति घोटाले से जुड़े धन शोधन के एक मामले में जमानत के लिए बुधवार को दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने के लिए मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा के समक्ष इसका उल्लेख किया गया और इसे सुनवाई के लिए बृहस्पतिवार को सूचीबद्ध किए जाने की अनुमति दी गई। याचिका पर बृहस्पतिवार को न्यायमूर्ति दिनेश कुमार शर्मा के समक्ष सुनवाई होगी।

सिसोदिया ने अपनी पत्नी की बीमारी के आधार पर नियमित जमानत याचिका के साथ-साथ अंतरिम जमानत याचिका दायर की है।

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के मामले में दायर अपनी नियमित जमानत याचिका में सिसोदिया ने पहले तर्क दिया था कि उनकी पत्नी 20 साल से ‘मल्टीपल स्केलेरोसिस’ से पीड़ित हैं और उनकी स्थिति और खराब होने की आशंका है। इस बीमारी में मांसपेशियों पर से व्यक्ति का नियंत्रण खो जाता है, जिसके चलते उसे हिलने डुलने, चलने या बात करने में परेशानी होती है।

उन्होंने निचली अदालत के 28 अप्रैल के उस आदेश को चुनौती दी है जिसके तहत धनशोधन मामले में उनकी जमानत याचिका को इस आधार पर खारिज कर दिया गया था कि सबूत प्रथम दृष्टया ‘‘अपराध में उनकी संलिप्तता के बारे में बताते हैं।’’

सीबीआई द्वारा दर्ज मामले में सिसोदिया की नियमित और अंतरिम जमानत याचिकाएं भी बृहस्पतिवार को न्यायमूर्ति शर्मा के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।

उन्हें सीबीआई और ईडी ने क्रमशः 26 फरवरी और नौ मार्च को भ्रष्टाचार एवं धनशोधन मामलों में गिरफ्तार किया था।

निचली अदालत ने कथित आबकारी नीति घोटाले से संबंधित धनशोधन के एक मामले में सिसोदिया की जमानत याचिका खारिज कर दी थी और कहा था कि साक्ष्य प्रथम दृष्टया ‘‘अपराध में किस हद तक उनकी संलिप्तता है, इस ओर इशारा करते हैं।’’

अदालत ने सिसोदिया को राहत देने से इनकार करते हुए कहा था कि अभियोजन पक्ष धनशोधन के कथित अपराध में सिसोदिया की संलिप्तता को लेकर एक वास्तविक और प्रथम दृष्टया मामला दिखाने में सक्षम रहा है।

अदालत ने ‘‘गंभीर प्रकृति के आरोपों और आपराधिक साजिश में सिसोदिया द्वारा निभाई गई भूमिका, अपराध की आय के सृजन और इस्तेमाल आदि से संबंधित गतिविधियों में उनकी संलिप्तता’’ को देखते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया था।

उसने कहा था कि सिसोदिया की पत्नी की कथित बीमारी भी उन्हें इस मामले में जमानत पर रिहा करने का आधार नहीं है।

अदालत ने कहा था कि सिसोदिया द्वारा मामले के प्रमुख गवाहों को प्रभावित किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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