देश की खबरें | निजी विद्यालयों में ईडब्ल्यूएस, वंचित श्रेणियों के छात्रों के लिए पहले ड्रॉ में 42,000 सीट आवंटित

नयी दिल्ली, पांच मार्च दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा है कि निजी विद्यालियों में प्रवेश स्तर की कक्षाओं में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) और वंचित समूह (डीजी) श्रेणियों के तहत 42,000 सीट पर विद्यार्थियों के दाखिले के लिए पहला कम्प्यूटरीकृत ‘ड्रॉ’ बुधवार को निकाला गया।

सूद ने कहा कि पिछले सालों के दौरान प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं होती थी।

उन्होंने कहा, ‘‘ इस वर्ष मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के मार्गदर्शन में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए अभिभावकों और मीडिया की उपस्थिति में लॉटरी निकाली गयी तथा पंजीकरण की सीमा 2.5 लाख से बढ़ाकर पांच लाख कर दी गई।’’

मंत्री के मुताबिक, नर्सरी में दाखिले के लिए कुल 24,933 सीटें उपलब्ध थीं, जिसके लिए 1,00,854 आवेदन प्राप्त हुए। ‘किंडरगार्टन (केजी)’ के लिए 4,682 सीटें उपलब्ध थीं, जिसके लिए 40,488 आवेदन आए। पहली कक्षा में 14,430 सीटें आवंटित की गईं, जिसके लिए 62,598 आवेदक आए।

सूद ने कहा कि प्रवेश स्तर पर दाखिला के लिए 3,134 विद्यालय हैं जिनमें नर्सरी के लिए 1,299, केजी के लिए 622 और पहली कक्षा के लिए 1,213 विद्यालय हैं।

सूद ने कहा, ‘‘नर्सरी के लिए ‘ड्रा’ सफलतापूर्वक आयोजित किया गया और सभी डेटा तुरंत सुरक्षित रख लिया गया। तीन सदस्यीय समिति को शिक्षा निदेशक को संबंधित जानकारी युक्त हस्ताक्षरित सीडी भेजने का निर्देश दिया गया।’’

उन्होंने कहा कि ‘ड्रॉ’ में चुने गए सभी विद्यार्थियों को शाम तक एक संदेश प्राप्त होगा और उन्हें दस्तावेज़ सत्यापन के लिए शिक्षा निदेशालय (डीओई) कार्यालय बुलाया जाएगा।

मंत्री ने कहा, ‘‘ डीओई द्वारा दस्तावेजों का सत्यापन कर लेने और प्रवेश को मंजूरी दे देने के बाद विद्यालय किसी भी दस्तावेज़ से संबंधित मुद्दे के आधार पर प्रवेश से इनकार नहीं कर सकते हैं।’’

उन्होंने कहा कि प्रक्रिया की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए, न तो शिक्षा निदेशक, अन्य अधिकारियों, अभिभावकों और न ही मीडिया प्रतिनिधियों को उस कमरे के अंदर मोबाइल फोन ले जाने की अनुमति दी गई, जहां ‘ड्रॉ’ आयोजित किया जा रहा था, ताकि किसी भी मानवीय हस्तक्षेप को रोका जा सके।

सूद ने कहा कि दिव्यांग बच्चों, तृतीय लिंग विद्यार्थियों और अन्य श्रेणियों के लिए पंजीकरण अवधि बढ़ा दी गई है, क्योंकि इन श्रेणियों में प्राप्त आवेदनों की संख्या उपलब्ध सीट की तुलना में कम है।

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